जब लगे सांस फूलने व बढ़ जाए दिल की धड़कन, बस 2 मिनट दें व Asthma को करें कंट्रोल

सांस लेने में होने वाली कठिनाई को कहते हैं सांस लेने वाली नलियों में सूजन हो जाती है या रुकावट आ जाती है आम लक्षणों में घरघराहट, खांसी, सीने में जकड़न  सांस लेने में समस्या आदि शामिल हैं अस्थमा दो तरह का होता है बाहरी  आंतरिक अस्थमा बाहरी अस्थमा एलर्जी से होती है, जो कि पराग, खुशबू, जानवर, धूल, मसाले या अन्य किसी कारण से हो सकती है आंतरिक अस्थमा में कुछ केमिकल तत्व बॉडी में आने से यह बीमारी होती है सिगरेट का धुआं, रंग-रोगन से यह हो सकता है इसके अतिरिक्त सीने में संक्रमण, तनाव या लगातार खांसी से भी दमा हो सकता है आनुवांशिकता के कारण भी अस्थमा होता है अब तो हो रहे हैं

दमा होने पर सांस लेने में परेशानी होती है सीने में जकड़न महसूस होती है सांस लेने में घरघराहट की आवाज होती है सांस तेज लेते हुए पसीना आने लगता है बेचैनी महसूस होती है जरा सी मेहनत से ही सांस फूलने लगता है लगातार खांसी आने लगती है अस्थमा लंबे समय चलने वाली बीमारी है  विशेषज्ञों का कहना है कि इंहेलेशन थेरेपी अस्थमा के इलाज का सबसे कारकर  प्रभावी उपाय है

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गाजियाबाद के वरिष्ठ एलर्जी विशेषज्ञ डॉ बीपी त्यागी बताते हैं कि इंहेल्ड कोरटिकोस्टेरॉयड थेरेपी अस्थमा को काबू करने का सबसे अच्छा उपाय है इस विधि से दवा की बहुत कम डोज सीधे सांस की नलियों में पहुंचती है

अस्थमा एक प्रकार की एलर्जी है जो किसी खुशबू या रंग से भी हो सकती है

डॉ त्यागी बताते हैं कि लगातार निर्माण कार्यों, सड़क पर बढ़ते वाहनों की संख्या  वातावरण में बढ़ते प्रदूषण के कारण भी दमा के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है उन्होंने बताया कि इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त तो नहीं किया जा सकता, मगर कुछ सावधानियां, तरीका तथा इलाज करके इसे बहुत ज्यादा हद तक घटाया जा सकता है

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