ईसाइयों के लिए एएमयू और जामिया की तर्ज पर गवर्नमेंट बनाए यूनिवर्सिटी

 जामिया मिलिया इस्लामिया की तर्ज पर गवर्नमेंट को ईसाइयों के सशक्तीकरण के लिए भी यूनिवर्सिटी स्थापित करनी चाहिए  उसमें इस समुदाय के शिक्षाविदों को सही प्रतिनिधित्व भी देना चाहिए. केंद्र गवर्नमेंट को यह सुझाव राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने दिया है. आयोग ने साल2016-17 की अपनी सालाना रिपोर्ट में बोला है कि उसके इस सुझाव पर सात वर्ष के अंदर अमल किया जाना चाहिए.

ईसाइयों के लिए सरकारी खजाने से बनाई जाने वाले विश्वविद्यालयों के लिए शैक्षणिक नीतियों के निर्धारण में इस समुदाय के शिक्षाविदों को शामिल किया जाना चाहिए. इससे संबंधित विशेषज्ञ समितियों में भी उन्हें जगह देना चाहिए. आयोग की इस रिपोर्ट को बजट सत्र में संसद में पेश किए जाने की आसार है. 

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इस अनुशंसा के बारे में पूछे जाने पर आयोग के चेयरमैन सैयद गयोरूल हसन रिजवी ने बोला कि इस कदम से एजुकेशन के एरिया में ईसाइयों की स्थिति मजबूत होगी. एएमयू  जामिया की तरह ईसाइयों की यूनिवर्सिटी में भी अन्य समुदाय के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाना चाहिए. आयोग ने बोला है कि गवर्नमेंट को ईसाइयों के लिए कम से कम एक यूनिवर्सिटी का निर्माण पूरी तरह से अपने खजाने से करना चाहिए.

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इसके लिए वह कैथोलिक बिशप कांफ्रेंस की मदद ले सकती है. याद रहे कि 2011 की जनगणना के मुताबिक सात वर्ष से ज्यादा आयु के बच्चों के लिए ईसाइयों की एजुकेशन दर 74.34 प्रतिशत है. इस आयु वर्ग में सबसे ज्यादा अशिक्षित मुस्लिम समाज में है जिनकी संख्या 42.72 प्रतिशत है. हिंदुओं के मामले में यह 36.4, सिखों के लिए 32.49  बौद्धों के लिए 28.17 प्रतिशत है.

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