सुप्रीम न्यायालय के चार जजों ने जो मुद्दे उठाए हैं

नई दिल्ली: उच्चतम कोर्ट के चार न्यायाधीशों द्वारा उठाए मुद्दों को ‘‘ बेहद गंभीर’’ बताते हुए कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रुवार को बोला कि न्यायमूर्ति लोया मामले को शीर्ष कोर्ट में उच्चतम स्तर पर देखा जाना चाहिए   कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने बोला ‘‘मुझे लगता है कि उच्चतम कोर्ट के न्यायाधीशों ने जो बिन्दु उठाये हैं, वे बेहद जरूरी हैं उन्होंने(न्यायाधीशों ने) बोला कि यह लोकतंत्र के लिए खतरा है मुझे लगता है कि इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए ’’ राहुल ने कहा, ‘‘ उन्होंने न्यायमूर्ति लोया का मामला उठाया जिसकी समुचित जांच कराये जाने की आवश्यकता हैइसे उच्चतम कोर्ट के शीर्ष स्तर पर गौर किये जाने की आवश्यकता है ’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा पहले कभी नहीं हुआ यह अभूतपूर्व है मुझे लगता है कि वे सभी नागरिक, जो न्याय  उच्चतम कोर्ट में विश्वास करते हैं, वे सभी इस मामले को देख रहे हैं ’’

चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने बोला कि उच्चतम कोर्ट में ‘सबकुछ अच्छा नहीं’
बता दें एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए उच्चतम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जे चेलामेश्वर  तीन अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों ने उच्चतम कोर्ट के न्यायतंत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यायमूर्ति चेलामेश्वर के अतिरिक्त न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर  न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ मौजूद रहे उन्होंने ‘चयनात्मक तरीके से’ मामलों के आवंटन  कुछ न्यायिक आदेशों पर सवाल उठाए इससे समूची न्यायपालिका  पॉलिटिक्स में तूफान खड़ा हो गया चार न्यायाधीशों के अप्रत्याशित कदम ने हाल के महीनों में शीर्ष न्यायालय में राष्ट्र के शीर्ष न्यायाधीश  कुछ वरिष्ठ न्यायाधीशों के बीच मतभेद को सामने ला दिया उच्चतम कोर्ट में फिल्हाल 25 न्यायाधीश हैं

जब न्यायाधीशों ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया तो न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने खुद बोलाकि इंडियन न्यायपालिका के इतिहास में यह एक ‘असाधारण घटना’ है उन्होंने कहा, ‘‘कभी-कभी उच्चतम कोर्ट का प्रशासन अच्छा नहीं होता है  पिछले कुछ महीनों में अवांछनीय बातें हुई हैं ’’ न्यायाधीश ने शीर्ष न्यायालय के कामकाज को प्रभावित करने वाले कुछ मुद्दों पर न्यायमूर्ति मिश्रा के ‘‘सुधार के लिए कोई कदम’ नहीं उठाने का आरोप लगाया न्यायाधीश ने बोला उन्होंने इन मुद्दों को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उठाया था

न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने संवाददाता सम्मेलन में बोला कि अगर इस संस्था की रक्षा नहीं की जाती है तो इस राष्ट्र में ‘‘लोकतंत्र का अस्तित्व नहीं रहेगा ’’ आजाद हिंदुस्तान के इतिहास में इस तरह की यह पहली घटना है इसने अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है कि कैसे इस पवित्र संस्था में खुले मतभेद का निवारण किया जाएगा

कड़ी आलोचना करते हुए न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने संवाददाता सम्मेलन में बोला कि उन्होंने (चारों न्यायाधीशों ने) आज प्रातः काल मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की थी  ‘‘संस्था को प्रभावित कर रहे मुद्दों को उठाया ’’ मुख्य न्यायाधीश  उच्चतम कोर्ट के चार सर्वाधिक वरिष्ठ न्यायाधीश उच्चतम कोर्टकॉलेजियम में होते हैं जो उच्चतर न्यायपालिका के लिये न्यायाधीशों का चयन करती है न्यायमूर्ति चेलमेश्वर के साथ संवाददाता सम्मेलन में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ भी मौजूद थे

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न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा, ‘‘अगर इस संस्था की रक्षा नहीं की जाती है तो इस राष्ट्र में लोकतंत्र का अस्तित्व नहीं रहेगा ’’ उन्होंने बोला कि इस तरह से संवाददाता सम्मेलन करना ‘बेहद पीड़ादायी’ हैसंवाददाता सम्मेलन का आयोजन न्यायमूर्ति चेलमेश्वर के आवास पर आयोजित किया गया था उन्होंने बोला कि सभी चार न्यायाधीश ‘सीजेआई को राजी करने में विफल रहे कि कुछ बातें सही नहीं हैं  इसलिये आपको सुधार के तरीका करने चाहिये दुर्भाग्य से हमारे कोशिश विफल रहे ’’

उन्होंने कहा, ‘‘और हम चारों का मानना है कि लोकतंत्र खतरे में है  हालिया अतीत में कई बातें हुई हैं ’’ यह पूछे जाने पर कि ये कौन से मुद्दे थे तो इसपर उन्होंने बोला कि इसमें ‘सीजेआई द्वारा मामलों का आवंटन भी शामिल था ’’ उनकी टिप्पणी का महत्व है क्योंकि शीर्ष न्यायालय ने आज विशेष CBI न्यायाधीश बी एच लोया की कथित तौर पर रहस्यमय तरीके से मौत के मुद्दे पर विचार करना प्रारम्भ किया लोया सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले पर सुनवाई कर रहे थे

न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा, ‘‘हमारी संस्था  देश के प्रति जिम्मेदारी है संस्था को बचाने के लिये कदम उठाने के लिये सीजेआई को समझाने के हमारे कोशिश विफल रहे हैं यह किसी राष्ट्र  खासतौर पर इस राष्ट्र के इतिहास  न्यायपालिका की संस्था में एक असाधारण घटना है बेहद दुख के साथ हम यह संवाददाता सम्मेलन बुलाने पर मजबूर हुए हैं ’’ इस घटनाक्रम पर सीजेआई के ऑफिस की तरफ से तत्काल कोई आधिकारिक रिएक्शन नहीं आई है यह पूछे जाने पर कि क्या वे चाहते हैं कि मुख्य न्यायाधीश के विरूद्ध महाभियोग चलाया जाए तो न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा, ‘‘देश को निर्णय करने दें ’’ इस बीच, केंद्र ने साफ कर दिया कि वह इस अप्रत्याशित घटनाक्रम में हस्तक्षेप नहीं करने जा रहा है उसने बोला कि न्यायपालिका खुद से मुद्दे का निवारण करेगी

चारों न्यायाधीशों ने सीजेआई को लिखा लेटर सार्वजनिक किया
चार न्यायाधीशों ने सीजेआई को जो सात पन्नों का लेटर लिखा है उसमें बोला गया है, ‘‘गहरी व्यथा  चिंता के साथ हमने सोचा है कि आपको यह लेटर लिखना उचित है ताकि इस न्यायालय द्वारा सुनाए गए कुछ न्यायिक आदेशों को उजागर किया जा सके, जिसने न्याय प्रदान करने की प्रणाली के समूचे कामकाज उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है इसके अलावा, इसने मुख्य न्यायाधीश के ऑफिस के प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित किया है ’’ न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने बताया कि लेटर कुछ महीने पहले सीजेआई को भेजा गया था इसे आज मीडिया को जारी किया गया

पत्र में बोला गया है, ‘‘इस राष्ट्र के विधिशास्त्र में भी यह सुस्थापित है कि मुख्य न्यायाधीश अन्य न्यायाधीशों के बराबर ही होते हैं  वे न तो कुछ अधिक या न ही इससे कुछ कम होते हैं ’’ लेटर में बोला गया है, ‘‘ऐसे कई दृष्टांत है जहां देश  संस्था के लिये दूरगामी परिणाम वाले मामलों को इस न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों ने चयनात्मक आधार पर इस तरह के आवंटन के लिये बिना किसी तार्किक आधार के ‘उनकी पसंद’ की पीठों को आवंटित किया है किसी भी मूल्य पर इससे रक्षा की जानी चाहिये ’’ लेटर में बोला गया है, ‘‘संस्था के शर्मसार होने से बचने के लिये हम विवरण का उल्लेख नहीं कर रहे हैं लेकिन इस बात पर गौर करते हैं कि इस तरह के विचलन ने कुछ हद तक पहले ही इस संस्था की छवि को क्षति पहुंचाई है ’’पत्र में मामलों के आवंटन पर न्यायाधीशों की चिंताओं को भी उठाया गया है

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