मप्र में गायों के बनेंगे आधार कार्ड…

भोपाल मध्य प्रदेश में अब गायों का भी आधार कार्ड बनेगा, जिसमें उनका नाम-पता, फोटो, दूध देने की क्षमता एवं सेहत संबंधी सारा रिकॉर्ड मौजूद रहेगा. मवेशी की पहचान बताने वाले 12 अंकों के इस अनूठे डिजिटल आधार कार्ड को राष्ट्र में कहीं भी एक क्लिक पर देखा जा सकेगा. प्रदेश के सभी 90 लाख दुधारू मवेशियों के आधार की यह स्मार्ट चिप उनके कान में चस्पा की जाएगी. केंद्र गवर्नमेंट के इस आधार
अभियान को राष्ट्र के अन्य राज्यों में भी चलाने की तैयारी की गई है.

प्रदेश के चार जिलों में शाजापुर, धार, आगर मालवा एवं खरगोन में करीब एक हजार मवेशियों पर पायलट प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है. इसकी सफलता के बाद गवर्नमेंट ने जल्दी ही सभी 51 जिलों में गाय-भैंसों के आधार बनाने की तैयारी कर ली है. इसके लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर (ईनाफ) तैयार कराया गया है. पशुपालन विभाग के कर्मचारियों को मवेशियों का पहचान लेटर बनाने के लिए टैबलेट्स दिए जाएंगे, जिसमें वह गाय-भैंस का डिजिटल ब्योरा दर्ज कर सकेंगे. टैबलेट्स खरीदने के लिए गवर्नमेंट ने टेंडर आदि की कार्रवाई भी प्रारम्भ की है. मवेशियों के कान में लगाए जाने वाले टैग इस महीने के अंत तक बन कर आने की आसार है.

15 करोड़ का बजट : केंद्र गवर्नमेंट की पशु संजीवनी योजना के तहत यह अभियान पूरे राष्ट्र में चलाया जाएगा. इस पर करीब 15 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिसमें 40 प्रतिशत अंशदान राज्य का होगा. प्रदेश के पशुपालन विभाग द्वारा मवेशियों की पहचान  पंजीयन के लिए करीब साढ़े तीन हजार कर्मचारियों को शुरुआती ट्रेनिंग दिलाई गई है.

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इस महीने के अंत तक प्रारम्भ होगा कार्य : विभागीय सूत्रों का दावा है कि नवंबर अंत तक सभी जिलों में आधार बनाने का कार्य प्रारम्भ होने की आसार है. मार्च 2018 तक इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य मिला है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि एक-दो माह का समय ज्यादा भी लग सकता है.

अवैध परिवहन पर लगेगा अंकुश : गाय-भैंस को चिप लगाने के साथ उनका एक कार्ड भी बनेगा, जो मवेशी के मालिक को दिया जाएगा. मवेशियों के आधार कार्ड से गौवंश के गैरकानूनी परिवहन पर अंकुश लग सकेगा. गुमे हुए मवेशियों को भी ढूंढा जा सकेगा. नयी तकनीक के बाद शहरों की सड़कों गांव-कस्बों में आवारा घूमने वाले पशुओं  उनके मालिकों की पहचान भी तुरंत हो सकेगी. परिवहन कर ले जाए जाने वाले मवेशियों का भौतिक सत्यापन भी संभव हो जाएगा.

गाय-भैंसों का ‘आधार’ तैयार करने वाली हिंदुस्तान गवर्नमेंट की इस योजना को लागू करने वाला मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य है. केंद्र ने अन्य राज्यों को भी यह योजना सौंपी है. प्रदेश चार जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे उत्साहजनक रहे. मवेशी के कान में लगने वाले ‘आधार टैग’ इस महीने के अंत तक बन कर आ जाएंगे. उसके बाद सभी जिलों में कार्य प्रारम्भ हो जाएगा. -अजीत केसरी, प्रमुख सचिव पशुपालन विभाग, मध्य प्रदेश

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