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‘करवा चौथ’ के नाम पर भक्तों से मोटी रकम वसूलता था बलातकारी बाबा

स्वयंभू बाबा बना गुरमीत राम रहीम सिंह अपने लिए लंबी उम्र और हमेशा के लिए अच्छी सेहत चाहता था. इसके लिए वो डेरे की अनुयायी लड़कियों और महिलाओं से करवा चौथ के दिन व्रत रखवाता था. बता दें कि हिन्दुओं में महिलाएं अपने पतियों की दीर्घायु के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं. हालांकि गुरमीत अपनी बेटियों और पत्नी को ये व्रत रखने की इजाज़त नहीं देता था.

गुरमीत राम रहीम के बारे में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं

बता दें कि हाल में सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ था जिसमें गुरमीत राम रहीम को महिला अनुयायियों से ये कहते सुना जा सकता है कि एक साधारण आदमी (पति) के लिए व्रत रखने से कुछ नहीं होगा, इसलिए उन्हें अपने भगवान (गुरु) के लिए व्रत रखना चाहिए जो पूरे ब्रह्मांड का पति है. गुरमीत खुद को ही सर्वशक्तिमान बताया करता था.

डेरा सच्चा सौदा के पूर्व अनुयायी भूपेंद्र सिंह के मुताबिक गुरमीत ने अपने अनुयायियों के लिए एक अलग ही करवा-चौथ जैसा व्रत बना रखा था. गुरमीत उन्हें ये कहकर झांसे में लिया करता था कि एक दिन व्रत रखने से कई गरीबों को खाना मिल सकता है. इस दिन गरीबों के घर महीने भर का राशन भेजने के नाम पर गुरमीत अपने अनुयायियों से करोड़ों रुपए दान के तौर पर लेता था.

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इस दिन का आयोजन इतना भव्य होता था कि पूरे देश से लोग डेरे से जुड़ा करते थे. वहीं विदेशों में रहने वाले अनुयायियों को वेबकैम के जरिए गुरमीत के साथ कनेक्ट किया जाता था. ये सब करने का मकसद एक ही दिन में अनुयायियों से मोटी रकम झटकने के लिए किया जाता था. ज्यादातर पैसा नकद आता था इसलिए जाहिर है उसका कोई हिसाब नहीं रखा जाता था.

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सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो में देखा जा सकता है कि गुरमीत के मंच के पास कुछ अनुयायी ऐसे पोस्टर लेकर बैठे हैं जिनमें लिखा है कि उनके लिए असली करवा चौथ उनके गुरु के ही नाम है. ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें गुरमीत महिलाओं की चिट्ठियां पढ़ने के साथ अनुयायियों को खास करवा चौथ के बारे में बता रहा है. साथ ही मंच से ये ऐलान भी किया जा रहा है कि किसने कितना दान दिया है.

डेरा के पूर्व अनुयायी भूपेंद्र सिंह का कहना है कि करवा चौथ व्रत के नाम पर आयोजन कर गुरमीत एक ही दिन में करोड़ों के वारे न्यारे कर लेता था. व्रत के लिए सारा सामान डेरे के अंदर से ही खरीदने के लिए अनुयायियों को बाध्य किया जाता था. बाहर बाजार में चीजों के जो भाव होते थे उससे चार-पांच गुणा ज्यादा कीमत डेरे में वसूली जाती थी.

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गुरमीत अनुयायियों को अपने दर्शन के बाद ही व्रत खोलने के लिए कहा करता था. अनुयायियों से व्रत रखवाने वाले गुरमीत ने अपने परिवार की महिलाओं को ये व्रत रखने के लिए मनाही की हुई थी. गुरमीत को लेकर जो खुलासे हो रहे हैं उससे यही लगता है कि उसने अपने स्वार्थ के लिए अपने अनुयायियों को हर कदम पर छला.

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