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च्युइंग गम चबाने से बढ़ रहा है कैंसर का खतरा

अगर आप भी बेहद च्युइंग गम चबाते हैं या फिर खाने में वाइट कलर का मेयोनीज आपको बहुत ज्यादा पसंद है तो इन चीजों का बेहद सेवन करने से पहले सावधान हो जाइए. इन चीजों में उपस्थित फूड एडिटिव की वजह से आपको कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

फूड एडिटिव की वजह से कैंसर का खतरा
दरअसल, खाद्य पदार्थों में रूप, रंग, गंध या अन्य किसी गुण को सुरक्षित रखने या बढ़ाने के लिए प्रयोग होने वाले एजेंट्स को फूड एडिटिव बोला जाता है. च्युइंग गम या मेयोनीज जैसी चीजों में वाइटनिंग एजेंट के रूप में आमतौर पर प्रयोग होने वाले फूड एडिटिव की वजह से पेट में जलन से जुड़ी बीमारी  कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा रहता है. हाल ही में हुई एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है.

  • हम जो खाते हैं उसका प्रभाव न सिर्फ हमारे वजन, स्कीन  बालों पर पड़ता है बल्कि हमारी ओवरऑल हेल्थ भी खाने-पीने की आदतों से ही जुड़ी है. फास्ट फूड  पैकेज्ड फूड के इस जमाने में हम इस बात पर ध्यान ही नहीं दे रहे कि आखिर इतनी सरलता से मिलने वाले इस तरह के खाने का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ रहा है. खान-पान की गलत आदतों की वजह से कैंसर जैसी बीमारियां भी तेजी से फैल रहीं हैं. ऐसे में हम आपको बता रहे हैं उन फूड आइटम्स के बारे में जिनसे आप जितनी दूरी बनाएंगे, आपकी स्वास्थ्यके लिए उतना ही अच्छा रहेगा
  • क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी नाम के जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक टोटल डायट्री फैट  सैच्युरेटेड फैट जैसी चीजें ज्यादा खाने से आदमी में फेफड़ों का कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में अगर आप इस तरह की बीमारियों से बचना चाहते हैं तो फ्रेंच फ्राइज जैसी चीजें जिसमें सैच्युरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है का सेवन करना बंद कर दें.
  • अमेरिकन इंस्टिट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च  वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड ने मिलकर एक रिसर्च की जिसमें बताया गया कि सिर्फ 1 गिलास ऐल्कॉहॉल मिश्रित पेय पदार्थ पीने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. वाइन के उस गिलास को खुद से दूर रखने के लिए यह कारण तो बहुत ज्यादा होगा.
  • यूके की फूड स्टैंडर्ड एजेंसी (FSA) के मुताबिक आपका पसंदीदा क्रिस्पी फ्राइड आलू आपकी स्वास्थ्य के लिए कई तरह से घातक है. आलू को फ्राइ करने के बाद उसमें जो कुरकुरापन आ जाता है वह खाने में भले ही आपको टेस्टी लगे लेकिन जब स्टार्च वाले खाद्य पदार्थ को उच्च तापमान पर फ्राई किया जाता है तो उसमें acrylamide बन जाता है. यह वही केमिकल है जो कैंसर के संभावित खतरे को कई गुना बढ़ा देता है. लिहाजा स्टार्च वाले किसी भी फूड आइटम को फिर चाहे वह आलू हो या ब्रेड- उसे डार्क ब्राउन करने की बजाए रोशनी गोल्डन ही रखना चाहिए.
  • चाय  कॉफी पसंद करने वाले सतर्क हो जाएं. वैसे तो चाय या कॉफी पीने से बेहद नुकसान नहीं होता. लेकिन अगर आपको अपनी कॉफी या चाय हद से ज्यादा गर्म पसंद है तो आप खुद को esophagal यानी गले से पेट तक जाने वाली नली के कैंसर के खतरे की ओर धकेल रहे हैं. अगर आप अपने गले को लगातार उच्च तापमान के सम्पर्क में ला रहे हैं तो खाने-पीने वाली नली में ट्यूमर विकसित होने का खतरा रहता है.
  • यह उन लोगों के लिए है जिनका खाना एक बोतल कोल्ड ड्रिंक पिए बिना नीचे ही नहीं उतरता. आपको जानकर हैरानी होगी कि आपकी फेवरिट सॉफ्ट ड्रिंक कैन में 10 चम्मच चीनी होती है. अगर आप डायट सोडा के ऑप्शन पर जा रहे हैं तब भी आर्टिफिशल स्वीटनर की वजह से कैंसर का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है. सॉफ्ट ड्रिंक में उपस्थितआर्टिफिशल स्वीटनर की वजह से सिर्फ कैंसर ही नहीं बल्कि स्ट्रोक  मोटापे का खतरा भी बढ़ जाता है.
  • इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रोसेस्ड मीट हमारी स्वास्थ्य के लिए बहुत बहुत बहुत बेकार है. आप शायद यह न जानते हों तो हम आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि सलामी  बेकन जैसे प्रोसेस्ड मीट में तो नाइट्राइट  नाइट्रेट की मात्रा भी बेहद होती है  इस तरह के केमिकल्स कई तरह का कैंसर उत्पन्न करने के खतरे से सीधे तौर पर जुड़े हैं.
  • माइक्रोवेव में 3 मिनट में तैयार होने वाले रेडीमेडी पॉपकॉर्न भी स्वास्थ्य के लिए घातक हैं. दरअसल, परेशानी पॉपकॉर्न से नहीं बल्कि उस पैकेट से है जिसमें पॉपकॉर्न का दाना रखा जाता है ताकि वे एक दूसरे से चिपके नहीं. जब आप उस पॉपकॉर्न वाले बैग को माइक्रोवेव में डालते हैं तो पैकेट में उपस्थित केमिकल्स पॉपकॉर्न तक पहुंच जाते हैं जिसमें से एक परफ्लोरिनेटेड कम्पाउंड है जो कैंसर बनाने के लिए जाना जाता है.

वाइटनिंग एजेंट के तौर पर इस्तेमाल
E171 जिसे टाइटेनियम डाइऑक्साइड नैनोपार्टिकल्स कहते हैं एक फूड एडिटिव है जिसका प्रयोग वाइटनिंग एजेंट के तौर पर बड़ी मात्रा में खाने-पीने की कई चीजों  यहां तक की दवाईयों में भी होता है. इस फूड एडिटिव का हमारे स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव होता है यह जानने के लिए चूहों पर एक स्टडी की गई. E171 का प्रयोग 900 से भी ज्यादा फूड प्रॉडक्ट्स में होता है  आम लोग हर दिन बड़ी संख्या में इस फूड एडिटिव का सेवन करते हैं.

गट यानी आंतों पर पड़ता है बुरा असर
फ्रंटियर्स इन न्यूट्रिशन नाम के जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी में बोला गया है कि ऐसे फूड आइटम्स का सेवन करना जिसमें E171 फूड एडिटिव शामिल है का सीधा प्रभाव हमारे गट यानी आंतों पर पड़ता है जिसकी वजह से पेट से जुड़ी कई बीमारियां  कोलोरेक्टल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने की संभावना भी रहती है. बावजूद इसके अबतक फूड एडिटिव्स का हमारी स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है इस बारे में बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है.

  • बॉलिवुड ऐक्टर ऋषि कपूर, ऐक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे  ऐक्टर आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा कश्यप- ये कुछ ऐसे नाम हैं जो पिछले वर्ष भिन्न-भिन्न तरह के कैंसर का शिकार हो गए थे. लेकिन अपनी मजबूत विल क्षमता  समय पर ठीक उपचार की बदौलत इन सिलेब्स ने कैंसर को हरा दिया है. हालांकि कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका पास उपचारहोने के बाद भी यह जानलेवा बीमारी दोबारा उभरकर वापस आ सकती है. कैंसर के कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं जो 5 वर्ष के भीतर दोबारा उभरते हैं जबकि कुछ को दोबारा आने में एक दशक से अधिक का समय लग जाता है. लिहाजा कैंसर का पास उपचार हो जाने के बाद भी कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए
  • अगर किसी कैंसर पीड़ित की सर्जरी होती है तो डॉक्‍टर्स निश्चित तौर पर कैंसर सेल्‍स को हटाने का पूरा कोशिश करते हैं, बावजूद कुछ सेल्‍स बच जाते हैं. ऑपरेशन के पहले ये सेल्‍स टूटकर बिखर जाते हैं  शरीर में रह जाते हैं. बाद में ये बढ़ते हैं. ऐसे में कीमोथेरपी, रेडियोथेरपी, हॉर्मोन थेरपी या बॉयोलॉजिकल थेरपी जारी रखना चाहिए ताकि शरीर के भीतर बचे सेल्‍स नष्‍ट हो सकें.
  • इलाज समाप्त हो जाने के कई वर्षों बाद तक आपको चिकित्सक से जाँच कराने की आवश्यकता बनी रहेगी. इन जांचों में शारीरिक जांचें  खून की जांचें शामिल हो सकती हैं जिनके आधार पर कैंसर की वापसी के बारे में पता चलने में मदद मिल सकती है. छाती के एक्स-रे, सीटी स्कैन  एमआरआई (MRIs) की आवश्यकता भी पड़ सकती है.
  • उपचार के बाद सर्वोत्तम चीज़ों में से एक है कि स्वस्थ खाने की आदतों को अपनाना. हर रोज़ कम से कम 2-3 कप सब्जियां  फल खाने की प्रयास करें. रिफाइंड यानी सफेद मैदा या शक्कर की स्थान पर मोटे अन्न वाले खाद्य पदार्थ खाएं. अधिक वसा वाले मीट को सीमित करें. हॉट डॉग, डेली मीट  बेकन जैसे परिष्कृत मीट का सेवन कम से कम करें. अगर आप शराब पीते हैं, तो हर दिन 1 पेग से ज्यादा शराब न पिएं. अधिक ऑयल वाले, भूने हुए, नमकीन या मसालेदार भोजन को नजरअंदाज करें  संतुलित एवं हल्का आहार लें.
  • कैंसर के उपचार के बाद अक्सर आवश्यकता से ज्यादा थकान महसूस होने लगती है. ऐसे में सामान्य आराम  इसे सहजता से लेने से थकावट को दूर किया जा सकता है.थकान को दूर करने के लिये कैंसर पीड़ितों को योग  मेडिटेशन के साथ नियमित व्यायाम करना चाहिए. इसके साथ ही म्यूजिक थेरपी के माध्यम से भी उन्हें बेहतर महसूस होने कि सम्भावना है  वे ऊर्जावान महसूस करते हैं.
  • कैंसर इलाज के बाद मरीजों में वजन घटने या बढ़ने की समस्या हो सकती है, लेकिन इसकी बहुत अधिक चिंता नहीं करनी चाहिए. हालांकि, कैंसर के मरीजों में वजन घटना बेहद आम बात है, लेकिन ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित स्त्रियों में फैट की चर्बी एक बड़ी समस्या है. लिहाजा वजन घटने को नियंत्रित करने के लिए रोजाना 450 कैलरी तक आहार लेना महत्वपूर्ण है. हल्का भोजन करें  कैंसर इलाज कराने से पहले प्रोटीन से भरपूर भोजन करने से परहेज करें, ताकि प्रतिकूलता से बचाव में मदद मिल सके. कैंसर इलाज के बाद मरीजों को पर्याप्त पानी पीना चाहिए  कार्डियो ऐक्टिविटीज करनी चाहिए.
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