Wednesday , April 24 2019
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अपने बेली फैट को कम करने के लिए अपनाएं ये टिप्स

कई बार आप बेली फैट को जितना कम करने की सोचते हैं वह उतना बढ़ रहा होता है इसे कम करने के लिए आपको ना जाने क्या क्या जतन करने पड़ते हैं बेली फैट से हर कोई ही परेशान है क्योंकि ऐसे में इंसान कई बार अपने मन के कपड़े भी नहीं पहन पाता इसके लिए आपको बेली फैट के प्रकारों के बारे में पता होना चाहिए जिसके बाद उसी तरीके से उसे कम करना चाहिए अत्यधिक मात्रा में फैटी फूड खाने से वॉटर रिटेंशन हो जाता है जिसकी वजह से बेली फैट बनने लगता है हम आपको बताने जा रहे हैं कि बेली फैट कितने तरह के होते हैं

पोस्टपार्टम बेली: प्रेग्नेंसी के बाद स्त्रियों के पोस्टपार्टम बेली विकसित हो जाता है इस तरह की बेली गर्भाशय के भारी हो जाने की वजह से होता है इस दौरान आपका पेट सामान्य होने में समय लगता है प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़े बेली फैट को कम करने के लिए बच्चे के जन्म के 3 महीने बाद अभ्यास करना शुरु कर देना चाहिए

सबक्यूटेनियस फैट: इस तरह का फैट स्कीन के नीचे एकत्रित होता है खासकर कमर, जांघ  कूल्हों पर सबक्यूटेनियस फैट आपके बॉडी की शेप को बेकार कर देता है इस तरह के फैट को कम करने में बहुत ज्यादा समय लगता है

स्ट्रेस बेली: तनाव की वजह से भी बेली फैट बन जाता है लंबे समय तक एक ही स्थान बैठे रहने  उसी स्थान पर बैठकर खाने की वजह से आपकी बेली पर फैट इकट्ठा होने लगता हैतनाव के साथ अस्वस्थ खान-पान की वजह से भी बेली फैट बढ़ जाता है

लोअर बेली बल्ग: इस तरह का फैट ज्यादातर स्त्रियों को प्रभावित करता है एक ही अभ्यास हमेशा करना  वहीं डाइट का लंबे समय तक सेवन करने की वजह से लोअर बेली बल्ग बनने लगता है इसकी वजह से आपके बॉडी का ऊपरी भाग सही शेप में होता है मगर बॉडी के निचले हिस्से की शेप बेकार हो जाती है

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