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298.47 अरब डॉलर का वाणिज्यिक निर्यात व 185.51 अरब डॉलर की सेवाओं का हुआ निर्यात

निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद आयात के मुकाबले उसके बेहद कम रहने से देश का व्यापार घाटा बढ़ गया है। पिछले 11 महीने के दौरान माल व सेवा क्षेत्र का कुल व्यापार घाटा 93.32 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो पिछले साल इसी अवधि के दौरान हुए 82.46 अरब डॉलर के व्यापार घाटे से 13 फीसदी ज्यादा है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक के अंतिम आंकड़े आने के बाद सरकारी आंकड़ों में इस घाटे की रकम में बदलाव भी हो सकता है।

सरकार की तरफ से जारी अस्थाई आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से फरवरी तक 11 महीने में देश का कुल निर्यात 483.98 अरब डॉलर रहा, जबकि इसी दौरान 577.31 अरब डॉलर का आयात किया गया। हालांकि भारत ने इस साल सेवा क्षेत्र में आयात के मुकाबले 72.20 अरब डॉलर ज्यादा का निर्यात किया। लेकिन उसे वस्तु व्यापार में घाटा उठाना पड़ा। वस्तु व्यापार में भारत को 165.52 अरब डॉलर का घाटा हुआ।

साथ ही देश का व्यापार घाटा बढ़ने में पेट्रोलियम पदार्थों के आयात में 32 फीसदी बढ़ोतरी ने भी अहम भूमिका निभाई। अप्रैल से फरवरी तक देश ने पिछले वित्त वर्ष के 97.53 अरब डॉलर के मुकाबले चालू वित्त वर्ष में 128.72 अरब डॉलर का आयात किया। गैर पेट्रोलियम वस्तुओं का आयात बिल पिछले साल के मुकाबले 3.09 फीसदी ज्यादा 335.28 अरब डॉलर दर्ज किया गया।

आयात-निर्यात का व्यापार

8.85 फीसदी बढ़ा वाणिज्यिक निर्यात, जबकि 8.54 फीसदी बढ़ा सेवाओं का निर्यात 2018-19 में
464 अरब डॉलर के सामानों का और 113.31 अरब डॉलर की सेवाओं का किया गया आयात
9.75 फीसदी बढ़ोतरी हुई वस्तु आयात में और 8.09 फीसदी बढ़ गया सेवा आयात 2018-19 में

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