Tuesday , March 26 2019
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पाकिस्तानी हिंदू ने बताया, Modi गवर्नमेंट का कानून हमारे लिए बड़ी राहत

अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न से परेशान होकर भागे सुरवीर सिंह को पहचान आजीविका के दो पाटों के बीच पिसना पड़ रहा है अपनी मातृभूमि भारत की नागरिकता के लिए आवश्यकताओं को पूरा करने  एक स्थिर जॉब पाने के लिए उनकी दुविधा 27 वर्ष बाद भी दूर होने का नाम नहीं ले रही है चार सदस्यों के अपने परिवार के साथ अमृतसर में रहने वाले 33 वर्षीय सिंह ने बोला कि उसे अपनी मातृभूमि में रहने के लिए हर दूसरे महीने सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते है साल 1992 में उसके माता-पिता के हिंदुस्तान आने का निर्णय लेने से पहले सुरवीर सिंह का परिवार अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में रहता था

सोवियत संघ की वापसी  मुजाहिदीन के आगमन के बाद हिंदुओं  सिखों के अफगानिस्तान छोड़ने की एक लहर सी चली थी परिवार का एकमात्र कमाने वाला होने के नाते सुरवीर सिंह कई तरह की नौकरियां करके अपनी आजीविका कमाते हैं   हालांकि उनका परिवार उसी समय हिंदुस्तान आया था  उनके परिवार के प्रत्येक आदमी के पास अलग-अलग तारीखों में जारी किये गये वीजा शरणार्थी प्रमाण लेटर हैं

सिंह ने बोला कि क्योंकि उनकी नागरिकता का आवेदन नौकरशाही के चक्रव्यूह में फंस गया है उन्हें अपने कागजातों को बनाये रखने के लिए नियमित रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत पड़ती है   उन्होंने कई राजनीतिक नेताओं से इंडियन नागरिकता हासिल करने की गुहार लगाई है लेकिन उन्हें आश्वासनों के अतिरिक्त कुछ नहीं मिला है सुरवीर सिंह ने कहा,‘‘हर 12 महीनों में कागजातों की अवधि खत्म होने के बाद, मुझे हर दो या तीन महीनों में इनके नवीनीकरण के लिए अपने परिवार के एक सदस्य के साथ नयी दिल्ली जाना पड़ता है ’’

उन्होंने बोला कि जॉब तलाशना पहले से ही बहुत कठिन है क्योंकि कोई भी शरणार्थियों को रोजगार नहीं देना चाहता है   यहां तक कि अगर किसी को जॉब मिलती है तो अक्सर उन्हें कम भुगतान किया जाता है  हर दूसरे महीने नयी दिल्ली जाने की जरूरत की वजह से नियोक्ता नाराज हो जाते है  वे ऐसे कर्मचारियों की तलाश करते है जिन्हें कम छुट्टी की आवश्यकता होती है हालांकि नरेन्द्र मोदी गवर्नमेंट के नागरिकता संशोधन विधेयक से सुरवीर सिंह  पाक तथा अफगानिस्तान के हजारों शरणार्थियों के मन में आस की उम्मीद फिर से जगी है

यह प्रस्तावित विधेयक नागरिकता कानून 1955 में संशोधन के लिए लाया गया है इस विधेयक के कानून बनने के बाद, अफगानिस्तान, बांग्लादेश  पाक के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी  ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 वर्ष के बजाय छह वर्ष हिंदुस्तान में गुजारने पर बिना उचित दस्तावेजों के भी इंडियन नागरिकता मिल सकेगी सुरवीर सिंह ने कहा,‘‘मैं गवर्नमेंट से इस विधेयक को जल्द से जल्द पारित करने का आग्रह करता हूं ’’ उनकी तरह ही सरन सिंह ने बोलाकि वह एक गरिमापूर्ण ज़िंदगी चाहते है

पाकिस्तान में करोड़ों रुपये मूल्य की अपनी संपत्ति छोड़कर 1999 में अपने परिवार के साथ पंजाब पहुंचे 50 वर्षीय सरन सिंह ने बोला कि पाक में उनके साथ दोयम दर्ज का व्यवहार किया जाता थावह पाक की खैबर एजेंसी में रहते थे जहां आतंकवाद  धार्मिक उत्पीड़न जोरों पर था उन्होंने बोलाकि आतंकी प्राय: उन्हें बाध्य किया करते थे कि यदि वे जीवित रहना चाहते हैं तो उनका परिवार इस्लाम कबूल कर ले

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