Saturday , December 15 2018
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देश भर में आलू किसानों के बुरे दिन शुरू…

देश भर में आलू किसानों के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के किसानों ने जो आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा है, उसकी कीमतें एक दम से धड़ाम हो गई हैं। पहाड़ी राज्यों में जहां पुराने आलू के दाम 1000 रुपये तक गिर गए हैं, वहीं मैदानी क्षेत्रों में भी फिलहाल 100 रुपये प्रति क्विंटल की कमी देखने को मिली है।
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संभल में 1000 रुपये धड़ाम कीमत

हिमाचल प्रदेश के ऊना क्षेत्र का नया आलू दिल्ली मंडी में दस्तक दे चुका है। नया आलू बाजार में आने से संभल के आलू का भाव धड़ाम हो गया है। पंद्रह दिन के भीतर आलू के भाव में 200-400 रुपये प्रति क्विंटल की मंदी आई है। बाजार भाव दिन प्रतिदिन टूटा है।

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पुखराज आलू 800 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है जबकि इसका भाव सात दिन पहले एक हजार रुपये प्रति क्विंटल था। चिप्सोना 1000-1100 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। यह आलू दस दिन पहले 1200-1400 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था। आलू की 3797 प्रजाति का भाव 900 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। जबकि यह आलू 1100-1200 रुपये प्रति क्विंटल बिक चुका है।

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मुरादाबाद मंडल के संभल व चंदौसी के आलू कारोबारियों और किसानों ने बताया कि 30 नवंबर से 15 दिसंबर तक संभल क्षेत्र का नया कच्चा आलू भी बाजार में आ जाएगा। अगर हिमाचल के आलू की मंडी में आवक बरकरार रही और संभल तथा आगरा से नए आलू की आवक दिल्ली मंडी में बढ़ी तो बाजार भाव और टूट सकते हैं लेकिन असली बात मांग और पूर्ति के सिद्धांत से तय होगी।

फिलहाल मंदी का माहौल है। इस समय कोल्ड स्टोरेज में रखा आलू तेजी से मंडी में आ रहा है। पुराने आलू की निकासी और नए आलू की आवक ने बाजार भाव को गिरा दिया है। संभल व चंदौसी से एक दिन में करीब 200 गाड़ी आलू दिल्ली मंडी के लिए जा रहा है।

सात लाख मीट्रिक टन आलू जनपद पैदा होने के आसार             

संभल जिले में 14,000 हेक्टेयर आलू का रकबा है। इसमें सात लाख मीट्रिक टन आलू पैदा होने के आसार हैं। जिले में कुल 51 कोल्ड स्टोरेज हैं। आलू की भंडारण क्षमता 3.48 लाख मीट्रिक टन है। इसमें 2.78 लाख मीट्रिक टन आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा गया था। आलू की 75-80 प्रशिशत तक निकासी हो चुकी है।

अब संभल के कोल्ड स्टोरेज में करीब 51 हजार मीट्रिक टन आलू होने का अनुमान है। नया आलू आने से पहले ही कोल्ड स्टोरेज पूरी तरह खाली हो जाएंगे। किसान आलू को लेकर उत्साहित हैं क्योंकि इस बार आलू का उन्हें अच्छा भाव मिला है। पिछली बार आलू सस्ता था। अगला सीजन कैसा होगा? इस पर मार्च 2019 में ही स्थिति साफ होगी।

किसान मंदी से डरा हुआ है। माल तेजी के साथ बाजार में भेज रहा है। अगर बात करें मंदी की तो 25 अक्तूबर के बाद से बाजार भाव लगातार टूट रहा है और 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की मंदी आई है। एक महीने पहले चिप्सोना 1700 रुपये प्रति क्विंटल था। अब 1100 रुपये प्रति क्विंटल का भाव  है।

इसी तरह पुखराज 1300-1400 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 800-900 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। लगातार मंदी से बिकवाली तेज हो गई है।  रफत उल्ला, उर्फ नेता छिद्धा, किसान संभल।

भाव कम होने से किसान चिंतित

अचानक आलू तेजी से मंदी की ओर चला गया। किसान उम्मीद कर रहे थे कि उन्हें फरवरी तक तेजी का लाभ मिलेगा पर ऐसा न हो सका। नवंबर में ही आलू मंदी का शिकार होने लगा। एक महीने में 600 रुपये क्विंटल की गिरावट दर्ज होने से किसान चिंता में हैं।
सदीरनपुर के किसान बाबू का कहना है कि अब तो आलू बेचने की जल्दी है। क्योंकि आलू खराब होने का भी खतरा है। वैसे फिलहाल की स्थिति है यह है कि आलू का भाव हाथ नहीं आ रहा है। क्योंकि जितना भाव सोच कर जाते हैं. अगले दिन आलू उससे मंदा हो जाता है।

यूपी के अन्य जिलों जैसे कि फिरोजाबाद, इटावा और मैनपुरी में भी आलू का भाव गिर गया है लेकिन अभी इसका ज्यादा असर देखने को नहीं मिल रहा है। कोल्ड स्टोरेज वाले आलू की कीमतों में 100 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आई है। शीतगृह एसोसिएशन फिरोजाबाद के अध्यक्ष गोपाल सिंह ने बताया कि अभी सिर्फ 100 रुपए तक आलू के रेट घटे हैं।

कोल्ड स्टोरेज में आलू का स्टाक भी कम रह गया है। मैनपुरी के डीएचओ सुरेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि एक महीने में 100 से 50 रुपए तक प्रति कुंतल आलू की रेट कम हुए हैं।  फिलहाल 1000 से 1200 रुपए प्रति कुंतल आलू बेचा जा रहा है।

हिमाचल में हजार रुपये की गिरावट

हिमाचल के ऊना में बाजार में आलू की नई फसल का मूल्य मात्र चार दिनों में ही 1000 रुपये प्रति क्विंटल गिर गया है। जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान होगा। जिले में कई ऐसे किसान हैं, जिन्होंने कामगार न मिलने के कारण अभी तक आलू की फसल नहीं निकाली है।

हालांकि कुछ किसानों द्वारा जालंधर, होशियारपुर सहित यूपी-बिहार से कामगारों को आलू की पटाई के लिए बुलाया जा रहा है। वहीं, कुछ किसान जालंधर व होशियारपुर से खुद ही गाड़ी आदि का इंतजाम कर कामगारों को आलू की पटाई के लिए ला रहे हैं। इसके साथ इनका खाने-पीने व रहने का भी इंतजाम किसानों को ही करना पड़ रहा है। आलू की फसल के मूल्य 1000 रुपये कम होकर बाजार में 3300 रुपये से सीधे 2300 रुपये हो गए हैं।

जिन किसानों ने सैकड़ों कनाल भूमि में आलू की फसल लगाई है, उन्हें सीधे तौर पर ही कई लाख रुपये की चपत लग गई है। जिला के प्रगतिशील आलू उत्पादन करने वाले किसान जगतार सिंह, पवन सैणी, शशि कुमार, दरबारा सिंह तथा प्रकाश चंद ने बताया कि आलू के दाम गिरने से उन्हें लाखों की क्षति होगी। इसकी वजह से किसान चिंतित हैं।

50 प्रतिशत तबाह हो चुकी है फसल

जिला ऊना में मौसम की मार से आलू की 50 प्रतिशत फसल पहले ही तबाह हो चुकी है। इसके साथ कई किसानों के खेत भी अत्यधिक पानी के कारण बह गए थे। जिससे किसानों को दोबारा से खेत तैयार कर आलू की फसल की बिजाई करनी पड़ी थी। इस मौसम की मार के कारण हर तीसरे छोटे किसान को कम से कम 5 से 20 हजार रुपये और बड़े किसानों को 4 से 8 लाख रुपये तक की क्षति हुई थी।

समय पर निकाले आलू की फसल

कृषि उपनिदेशक सुरेश कपूर ने बताया कि कोई भी किसान आलू की फसल के कम होते मूल्यों के कारण समय से पहले आलू की फसल की पटाई न करें। क्योंकि आलू की फसल का निर्धारित समय दो माह है। अगर किसान दो माह से पहले आलू की फसल की पटाई करते हैं तो किसानों को आलू की फसल की उचित पैदावार नहीं मिल पाएगी।

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