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इलेक्ट्रिक वाहन की चार्जिग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना होगी एक बड़ी चुनौती

भारत में लगातार बढ़ रहा प्रदुषण का स्तर लोगों की समस्या बना हुआ है। जिसके निवारण के लिए कंपनियां लगातार कोशिश कर रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार भी  इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर जोर दे रही है, लेकिन अभी भी इलेक्ट्रिक वाहन की चार्जिग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना एक बड़ी चुनौती है।

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जिसका समाधान शायद अब मिल गया है सामने आई जानकारी के मुताबिक जल्द ही सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल की चार्जिंग के लिए अब नई पॉलिसी ला रही है जिसमें आम आदमी को स्टेशन लगाने के लिए कोई खास कागजात की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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केंद्रीय मिनिस्टर आर.के.सिंह ने एक बयान में कहा है कि भारत में बढ़ रही प्रदुषण की समस्या से निजात पाने के लिए लगभग 175 GW क्लीन एनर्जी प्रोड्यूस करने के सेटअप पर काम करने की जरूरत है। आर.के.सिंह ने आगे बताया कि इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन को पेट्रोल पंप पर लगाने के लिए भी सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। हालांकि अभी प्रतिक्रिया आनी बाकी है।

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सरकार से देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिये एक दीर्घकालीन नीति लाने  पर विचार करने को कहा। इस प्रकार की नीति होने से उद्योग भविष्य के लिये निवेश योजनाएं सही तरीके से बना पायेगा। हालांकि सियाम ने इस खंड को वास्तविक संभावना को लागू करने के लिये कम कर की भी मांग की।

सोसाइटी आफ इंडियन आटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स (सियाम) के सालाना सम्मेलन को संबोधित करते हुए निवर्तमान अध्यक्ष अभय फिरोदिया ने सरकार के इलेक्ट्रिक वाहन नीति से अभी तक  दूर रहने के निर्णय पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि सरकार के अनुरोध पर सियाम ने ‘‘ 2030 तक 40 प्रतिशत वाहन बिजली से चलाने तथा 2047 तक 100 प्रतिशत वाहनों को इसके दायरे में लाने के लिये नीति का प्रस्ताव रखा है।’’

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