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गैंगेस्टर एक्ट के आरोपी की जमानत लेने वाले बहरूपिये को किया गिरफ्तार

तल्लीताल पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों से गैंगेस्टर एक्ट के आरोपी की जमानत लेने वाले बहरूपिये को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
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11 अप्रैल 2015 को पांच बदमाशों ने काठगोदाम के शीशमहल स्थित एक प्लाईवुड सेंटर में चार लाख रुपये और कुछ सामान चोरी किया था। पुलिस ने उस चोरी का केस वसीम उर्फ शादाब निवासी कच्ची बस्ती बेगमपुरवा, कानपुर, उत्तर प्रदेश व चार अन्य लोगों पर दर्ज किया था। तत्कालीन एसओ काठगोदाम नरेश चौहान ने सभी आरोपियों पर गैंगेस्टर एक्ट लगाया। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद केस का एक आरोपी जमानत पर छूट गया। आरोपी ने जमानती के रूप में हुकुम सिंह व महावीर सिंह निवासी महुवाखेड़ा थाना आईटीआई जनपद ऊधमसिंह नगर को बनाया था। जमानत होने के बाद वसीम लापता हो गया। ऐसे में कोर्ट ने उसके खिलाफ सम्मन, वारंट और कुर्की की कार्रवाई की। इस कार्रवाई में पता चला कि आरोपी वसीम ने काठगोदाम पुलिस के आंखों की धूल झोंक कर फर्जी नाम व पता दर्ज करवा दिया है। पुलिस ने बिना जांच पड़ताल के वसीम के बताए नाम व पते के आधार पर मुकदमा लिख लिया और सत्यापन या कोई दस्तावेज देखने की जहमत नहीं उठाई। पुलिस ने दूसरी गलती करते हुए बिना किसी जांच पड़ताल के फर्जी नाम व पते के आधार पर ही गैंगेस्टर लगा दिया। इतनी बड़ी जालसाजी का खुलासा हुआ तो तत्कालीन जिला जज कुमकुम रानी के रीडर सत्य प्रकाश सुयाल ने तल्लीताल थाने में धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज करवा दिया। केस की विवेचना एसआई मनोज सिंह नयाल को सौंपी गई। मनोज सिंह आरोपी वसीम की तलाश करते हुए जमानतियों तक पहुंचने का प्रयास करने लगे तो पता चला कि जमानतियों के भी नाम व पते फर्जी हैं। इससे केस में एक और नया मोड़ आ गया। विवेचक मनोज सिंह ने लंबी चली जांच के बाद फिंगर प्रिंट के आधार पर हुकुम सिंह बनकर जमानत लेने वाले विजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में विजय सिंह ने खुलासा किया कि दूसरे जमानती महावीर सिंह का भी नाम व पता फर्जी है। वह सरजीत सिंह निवासी श्यामनगर बाबरखेड़ा थाना कुंडा जनपद, ऊधमसिंह नगर है। इसके बाद एसओ तल्लीताल राहुल राठी के निर्देशन में विवेचक मनोज सिंह नयाल ने आरोपी सरजीत सिंह को सोमवार को बाबरखेड़ा मजार वाली पुलिया से गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को आरोपी को अदालत में पेश किया गया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।

साल 2015 में काठगोदाम थाने से शुरू हुआ था फर्जीवाड़ा
बाद में शातिरों ने अदालत में भी दाखिल कर दिए फर्जी दस्तावेज
जमानत के बाद गैंगेस्टर के फरार होने से खुला षड्यंत्र

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