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हॉकी के इस महाकुंभ में इंडियन टीम 43 वर्ष बाद मेडल जीतने में सफल रहेगी…

कभी इंडियन हॉकी की दीवार कहे जाने वाले महान डिफेंडर दिलीप टिर्की को अपने कैरियर में ओलंपिक व वर्ल्ड कप में मेडल नहीं जीत पाने का मलाल है लेकिन उन्हें यह उम्मीद है कि उनके शहर में पहली बार हो रहे हॉकी के इस महाकुंभ में इंडियन टीम 43 वर्ष बाद मेडल जीतने में सफल रहेगी। हिंदुस्तान ने एकमात्र वर्ल्ड कप 1975 में जीता था व उसके बाद से आठ बार की ओलंपिक चैम्पियन टीम मेडल जीतने में नाकाम रही। खिताब जीतने से पहले 1973 में हिंदुस्तान ने रजत व 1971 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। पिछली बार 2014 में हुए वर्ल्ड कप में हिंदुस्तान नौवें व 2010 में दिल्ली में हुए वर्ल्ड कप में आठवें जगह पर रहा था।

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पूर्व कप्तान टिर्की ने एक साक्षात्कार में बोला ,‘‘मैं अपने करियर ग्राफ से खुश हूं लेकिन यही दुख है कि ओलंपिक या वर्ल्ड कप नहीं जीत सका। मेरे खेलने के दिनों में हमने एशियाई स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया। मुझे ओलंपिक में कप्तानी का मौका मिला। चैम्पियंस ट्रॉफी में चौथे व ओलंपिक में सातवें जगह पर रहे जबकि एफ्रो एशियाई खेलों में स्वर्ण मेडल जीता। ’’

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उन्होंने कहा, ‘‘इस बार मुझे लगता है कि हमारे पास मेडल जीतने का सुनहरा मौका है। कलिंगा स्टेडियम पर 15000 दर्शक जब इंडियन टीम की हौसलाअफजाई करेंगे तो अच्छे प्रदर्शन की अलावा प्रेरणा मिलेगी। ’’

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हॉकी वर्ल्ड कप 28 नवंबर से 16 दिसंबर तक यहां खेला जाएगा जिसमें 16 टीमें भाग ले रही हैं।

टिर्की ने कहा, ‘‘भारतीय टीम का आक्रमण बहुत अच्छा है। मनप्रीत, मनदीप व आकाशदीप बेहतरीन स्ट्राइकर हैं। पी आर श्रीजेश की अगुवाई में डिफेंस भी अच्छा है। चैम्पियंस ट्राफी में जिस तरह तालमेल से खेले , उसी तरह सीनियर जूनियर टीम का अच्छा संयोजन रहने पर हम मेडल जीत सकते हैं। ’’

अनुभवी मिडफील्डर सरदार सिंह को नहीं चुने जाने व उनके हॉकी से संन्यास को हैरानी भरा बताते हुए उन्होंने बोला कि टीम को सरदार की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा, ‘‘सरदार खेल सकता था व बस एक महीने की बात थी। मुझे भी हैरानी है कि वह इस तरह से बाहर हुआ। टीम को उसके हुनर व अनुभव की आवश्यकता थी। ’’

हॉकी के ‘कैप्टन कूल’ रहे टिर्की ने खिलाड़ियों को संयम के साथ खेलने की सलाह दी।

उन्होंने कहा, ‘‘आज हॉकी इतनी तेज हो गई है कि खिलाड़ियों को समझ ही नहीं आता कि क्षण में क्या हो गया। पहले की हॉकी अलग थी व हम कूल होकर खेलते थे। मैं खिलाड़ियों से यही कहूंगा कि संयम के साथ ही खेलें। ग्रीनकार्ड वगैरह से हॉकी को ही नुकसान होगा। ’’

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