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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव का गणित लगाना राजनीतिक पंडितों के लिए टेढ़ी खीर

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव का गणित लगाना राजनीतिक पंडितों के लिए टेढ़ी खीर होता जा रहा है। हाल ही में हुए सर्वे बता रहे हैं कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सत्ता में वापसी करने वाली है और भाजपा की राह मुश्किल होने वाली है। आइए आपको कांग्रेस के कई ऐसे किलों के बारे में बताते हैं, जिनको भाजपा अभी तक भेद नहीं पाई है।

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भोपाल उत्तर

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पिछले चार विधानसभा चुनावों से भाजपा इस सीट को हर हाल में जीतना चाहती है। यहां से कांग्रेस के आरिफ अकील विधायक हैं और मुस्लिमों का सबसे मजबूत चेहरा माने जाते हैं। हालांकि पिछले चुनाव में यहां जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला था, लेकिन इस बार यहां सम्मान की बड़ी जंग होने वाली है।

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लहार

कांग्रेस की परंपरागत सीटों में भिंड जिले की लहार विधानसभा सीट अहम मानी जाती है। पिछले छह चुनावों से कांग्रेस के कद्दावर नेता डॉक्टर गोविंद सिंह लगातार इस सीट पर विराजमान हैं। भाजपा की कोशिश होगी कि गोविंद सिंह के खिलाफ यहां से दमदार प्रत्याशी उतारे ताकि कांग्रेस के एकछत्र राज को खत्म किया जा सके। हालांकि, गोविंद सिंह पिछले लोकसभा चुनाव में हार चुके हैं।

राजनगर

पिछले तीन चुनावों से कांग्रेस प्रत्याशी विक्रम सिंह नातीराजा बुंदेलखंड क्षेत्र के छतरपुर में आने वाली राजनगर सीट से जीत रहे हैं। 2013 के चुनाव में भाजपा नेता रामकृष्ण कुसमरिया को मात दी थी। कांग्रेस से ये सीट छीनने के लिए भाजपा हर कोशिश करेगी।

चुरहट

चुरहट विधानसभा कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की परम्परागत सीट मानी जाती है। सीधी जिले में आने वाली चुरहट सीट कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ कहा जाता है। यहां जीत हासिल करने के लिए भाजपा हर चुनाव में अपना प्रत्याशी बदलती है, लेकिन नाकाम रहती है। अजीत सिंह के पुत्र अजय सिंह पिछले पांच चुनावों में यहां से लगातार जीत हासिल कर रहे हैं।

राघोगढ़ 

गुना जिले की राघोगढ़ विधानसभा सीट का भाजपा आजतक कोई तोड़ नहीं निकाल पाई है। राघोगढ़ को कांग्रेस का अभेद किला कहा जाता है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का इस सीट पर दबदबा माना जाता है। 2003 चुनाव में शिवराज सिंह चौहान को दिग्विजय सिंह ने मात दी थी। फिलहाल इस सीट पर दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह का कब्जा हैं।

राजपुर

बड़वानी जिले की राजपुर सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बाला बच्चन यहां से विधायक हैं। 2003 में भाजपा राजपुर सीट जीतने में सफल हुई थी, लेकिन इसके बाद कांग्रेस ने ये सीट हथिया ली।

पिछोर

शिवपुरी जिले में आने वाली पिछोर से कांग्रेस प्रत्याशी केपी सिंह 1993 से लगातार विधायक चुने जा रहे हैं। पिछले चुनाव में भी केपी सिंह ने भाजपा के उम्मीदवार को करारी मात दी थी। माना जा रहा है कि इस बार यहां कांटे का मुकाबला होने वाला है।

विजयपुर

श्योपुर जिले में आने वाली विजयपुर सीट कांग्रेस का मजबूत गढ़ है। पिछले पांच बार से रामनिवास रावत यहां से जीत हासिल कर रहे हैं। रामनिवास रावत ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी भी माने जाते हैं। भाजपा पूरी ताकत से यहां मैदान पर उतरती है लेकिन फिर भी उसे जीत मयस्सर नहीं होती। इस बार मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है।

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