Wednesday , October 17 2018
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रिटेल व ई-कॉमर्स का हो रहा तेजी से विस्तार…

देश की 68 फीसदी आबादी गांवों में रहती है और वह उपभोक्ता क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए कारोबार का एक विशाल अवसर प्रस्तुत करती है। यह बात एक रिपोर्ट में कही गई है। डिलॉई और फिक्की की संयुक्त रिपोर्ट ‘कंज्यूमर लीड्स’ में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था के विस्तार और भारत में बढ़ रहे उपभोक्तावाद के कारण इन कंपनियों के लिए देश में कारोबार करने के विशाल अवसर मौजूद हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गांव के घर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 50 फीसदी का योगदान करते हैं। इसके अलावा ये एफएमसीजी बिक्री में 40 फीसदी, दोपहिया वाहनों की बिक्री में 50 फीसदी, चार पहिया वाहनों की बिक्री में 30 फीसदी और दूरसंचार क्षेत्र में 45 फीसदी का योगदान करते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बेहतर परिवहन सुविधाएं, गैर-कृषि रोजगार के बढ़ने से खर्च करने की क्षमता में बढ़ोतरी और इंटरनेट के विस्तार से जागरूकता में हुई वृद्धि जैसे कारक आगे भी ग्रामीण बाजारों के विकास को बढ़ावा देंगे।

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परिवार का आकार छोटा होने से बढ़ रही मांग

रिपोर्ट में कहा गया है कि खपत में बढ़ोतरी हो रही है। प्रति व्यक्ति आय 2025 तक 10.2 फीसदी बढ़कर 2,66,500 रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है। विवेकाधीन खर्च का अनुपात भी 2025 तक बढ़कर 45 फीसदी हो जाने का अनुमान है, जो अभी 35 फीसदी पर है। रिपोर्ट के मुताबिक परिवारों का आकार छोटा होने के कारण घरों की बढ़ती संख्या से भी मांग में बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

डिलॉई इंडिया के साझेदार रजत वाही ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में स्वस्थ विकास और देश में में अनुकूल जनसांख्यिकी कारकों से रिटेल, उपभोक्ता पैकेज्ड वस्तु (सीपीजी) और ई-कॉमर्स क्षेत्र को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं रिपोर्ट के अनुसार रिटेल उद्योग का विकास अगले चार साल तक सालाना 10 फीसदी से अधिक रफ्तार से होने का अनुमान है।

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इसका आकार 2017 के 795 अरब डॉलर से बढ़कर 2021 तक 1,200 अरब डॉलर का हो जाएगा। इसी अवधि में ई-कॉमर्स बाजार का आकार 30 फीसदी से अधिक विकास के साथ 2021 तक 80-120 अरब डॉलर का हो जाने का अनुमान है, जो अभी 24 अरब डॉलर का है।

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