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अधिकतर पेट्रोल पंप पहुंचे बंद होने की कगार

जिस तरह से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ रही है, उसे देखते हुए इसके शीघ्र ही 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर चले जाने की आशंका है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि पेट्रोल की कीमतें इस स्तर से ऊपर जाती हैं तो क्या देश के अधिकतर पंप को बंद करना होगा।

क्योंकि इस समय देश के अधिकतर पंपों में उत्पाद के दाम तीन अंकों (100 रुपये) में अंकित करने की सुविधा नहीं है। इनमें अधिकतम 99.99 रुपये की कीमत ही अंकित हो सकती है। दिल्ली में इसी महीने कुछ पंपों पर बिक्री इसलिए बंद करनी पड़ी थी, क्योंकि वहां बिकने वाले प्रीमियम पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के पार चली गई थी थी।

पेट्रोलियम मंत्रालय से मिले आंकड़े के अनुसार 1 अप्रैल 2018 को देश में कुल 62,585 पेट्रोल पंप चल रहे थे। इनमें से आधे से कुछ कम पंपों पर आधुनिकतम मशीनें लग चुकी हैं या लगायी जा रही हैं। इन्हें कुछ ही देर में रिकैलिबर किया जा सकता है। लेकिन शेष पंपों पर पुरानी मशीनें लगी हुई हैं जिनमें ईंधन के दाम अधिकतम 99.99 रुपये ही प्रदर्शित हो सकते हैं।

इससे ऊपर जाने पर पेट्रोल पंप पर बिक्री रोकनी पड़ेगी, क्योंकि मशीन अपने आप कीमतों को सही-सही नहीं जोड़ पाएगा। हालांकि मंत्रालय के अधिकारी बताते हुए हैं कि ऐसी कोई दिक्कत नहीं होने वाली है क्योंकि मशीनों को इसी हिसाब से रिकैलिबर करने का काम चल रहा है।

एचपीसीएल के 60 फीसदी पंप हो चुके हैं आधुनिक
हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एमके सुराना ने बताया कि इस समय उनके करीब 8,500 पेट्रोल पंपों (60 फीसदी) को आधुनिक बनाया जा चुका है। मलतब इन पंपों पर डिजिटल तरीके से ही सब कुछ हो रहा है। उन पंपों पर दैनिक आधार पर कीमत में परिवर्तन भी सेंट्रलाइज्ड सर्वर से ही हो जाता है। उन्होंने बताया कि आगामी दिसंबर तक उनके शत-प्रतिशत पंप आधुनिक हो जाएंगे।

छोटे शहरों और दूर दराज के इलाकों में चल रहे हैं पुराने पंप
इस समय छोटे शहरों तथा दूर दराज के इलाके में पुराने पंप ही चल रहे हैं। ऑल इंडिया पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के प्रधान अजय बंसल का कहना है कि इन पंपों पर भी दिक्कत नहीं आएगी, क्योंकि डीलर हाथ से लिख कर रेट लटका देगा। ऐसे में हालांकि मशीन अपने आप कीमत की गणना नहीं कर पाएगी। अभी मशीन ही सब कुछ कर लेती है।

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