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वाहन मालिकों के लिए जरूरी हुआ 15 लाख रुपये का एक्सीडेंट बीमा कवर

अब से दोपहिया सहित सभी प्रकार की गाड़ियों के मालिकों को 15 लाख रुपये का एक्सीडेंट बीमा कवर लेना जरूरी होगा। बीमा नियामक प्राधिकरण इरडा ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं। इरडा ने सभी बीमा कंपनियों का आदेश दिया है कि यह नियम सभी तरह की गाड़ियों पर लागू होगा।

दोपहिया वाहन चालकों को होगा फायदा
इस आदेश का सबसे ज्यादा लाभ दोपहिया वाहन चालकों को होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि देश में होने वाली ज्यादातर वाहन दुर्घटनाओं में दोपहिया चालक शिकार होते हैं। फिलहाल इस श्रेणी में दोपहिया और निजी कार/वाणिज्यिक वाहनों के लिए बीमा राशि एक लाख और दो लाख रुपये है।

हालांकि, कुछ साधारण बीमा कंपनियां पैकेज नीति के तहत अतिरिक्त प्रीमियम के भुगतान पर अधिक बीमा राशि को लेकर अतिरिक्त कवर की पेशकश करती हैं। इरडा ने सभी बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे मालिक-चालक के लिए कवर को लेकर अनिवार्य व्यक्तिगत दुर्घटना (सीपीए) के तहत 750 रुपये सालाना प्रीमियम पर न्यूनतम बीमा कवर 15 लाख रुपये उपलब्ध कराएं। यह आदेश अगले नोटिस तक वैध होगा।

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सरकार ने दिया बीमा कंपनियों को आदेश
सड़क परिवहन मंत्रालय ने सभी बीमा कंपनियों को आदेश दिया है कि वो हर उस गाड़ी की जानकारी को साझा करें जिसका बीमा (साधारण व थर्ड पार्टी) उन्होंने किया है। इससे सरकार ऐसे वाहन मालिकों को आसानी से पकड़ सकेंगी, जिन्होंने अपनी गाड़ी का बीमा नहीं कराया है। इंश्योरेंस इंफोर्मेशन ब्यूरो के मुताबिक अभी देश भर में केवल 6.5 करोड़ गाड़ियों का बीमा हुआ है, जबकि 21 करोड़ गाड़ियां पंजीकृत हैं।

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सरकार लेकर आ रही है वेबसाइट

सड़क मंत्रालय एक वेबसाइट शुरू करने जा रही है, जिस पर हर गाड़ी की जानकारी होगी, जो बिना बीमा के देश भर में चल रही हैं। इस वेबसाइट की मदद से देश के हर राज्य का ट्रांसपोर्ट विभाग और ट्रैफिक पुलिस ऐसे लोगों पर सख्ती कर सकेगी, जो अपनी गाड़ियों का बिना बीमा कराये ही सड़कों पर दौड़ाते हैं।

55 फीसदी गाड़ियों का नहीं है बीमा
अभी देश भर में करीब 55 फीसदी गाड़ियां ऐसी हैं, जिनका इनका बीमा नहीं है। इसके अलावा कई गाड़ियां कबाड़ या फिर लंबे समय से खड़ी हैं, जिनका इस्तेमाल कोई नहीं करता है। केवल 40-50 फीसदी दोपहिया मालिकों ने बीमा करा रखा है।

ये है कानून
अगर किसी वाहन स्वामी ने अपनी गाड़ी का थर्ड पार्टी बीमा नहीं कराया है तो फिर उस पर या तो एक हजार रुपये का जुर्माना अथवा तीन महीने की सजा का प्रावधान है। सरकार का मानना है कि थर्ड पार्टी बीमा नहीं होने से किसी दुर्घटना में घायल अथवा मृत व्यक्ति को पूरा मुआवजा नहीं मिलता है।

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