Wednesday , December 12 2018
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उच्च-मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में पहुंचेगा भारत

विश्व बैंक ने भारत के लिए एक महत्वाकांक्षी पांच वर्षीय ‘स्थानीय भागीदारी व्यवस्था’ (सीपीएफ) को मंजूरी दे दी है। इसके तहत भारत को 25 से 30 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है, ताकि देश को निम्न मध्य-आय वाले देशों की श्रेणी से उच्च-मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में पहुंचने में मदद मिल सके। विश्व बैंक मानना है कि सीपीएफ योजना से भारत को अपने समावेशी और स्वस्थ आर्थिक वृद्धि के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।
विश्व बैंक के निदेशक मंडल ने भारत के उच्च मध्य आय देश बनने के लक्ष्यों का समर्थन किया है। इस सहायता से देश की बुनियादी विकास की प्राथमिकताओं की कुछ समस्याओं का निवारण करने में आसानी होगी। इसमें संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल और समावेशी विकास, रोजगार सृजन और मानव पूंजी का निर्माण जैसी प्राथमिकताएं शामिल हैं।

इस भागीदारी व्यवस्था के तहत भारत को अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (आईबीआरडी), अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) और बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (एमआईजीए) से पांच साल में 25 से 30 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता आने की उम्मीद जताई गई है।

चरणबद्ध तरीके से होगी समस्याओं की पहचान

विश्व बैंक के उपाध्यक्ष और दक्षिण एशिया मामलों के प्रभारी हार्टविंग शेफर ने कहा, ‘तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, वैश्विक कद और पिछले दशकों में सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाने के अपने विशेष अनुभव के चलते भारत 2030 तक एक उच्च मध्य आय वाला देश बनने की अच्छी स्थिति में है।’

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विश्व बैंक के भारतीय निदेशक जुनैद अहमद ने कहा, ‘सीपीएफ में चरणबद्ध तरीके से देश की समस्याओं की पहचान की जाएगी जो देश के बारे में एक प्रस्तावना पेश करेगा। विश्व बैंक पिछले कई दशकों में भारत की आर्थिक प्रगति और विकास को मान्यता देता है।
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