Monday , December 17 2018
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चीनी निर्यात बढ़ाने को मिल सकती है छूट, जाने क्या है माजरा

केंद्र सरकार चीनी निर्यात पर छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर सकती है। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष यह प्रस्ताव रखा जाएगा। उपभोक्ता एवं खाद्य मामलों के मंत्रालय ने गन्ना किसानों के बकाए के जल्द भुगतान के मद्देनजर यह प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें कुल 50 लाख टन चीनी के निर्यात पर छूट मुहैया कराने की सिफारिश की गई है।

खाद्य मंत्रालय ने हाल ही में 20 लाख टन चीनी निर्यात के लिए समय सीमा तीन माह बढ़ाकर दिसंबर तक कर दिया है। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अब तक केवल 5 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया है। इसी वजह से मंत्रालय ने चीनी निर्यात पर छूट मुहैया कराने का प्रस्ताव तैयार किया है। ताकि चीनी मिले ज्यादा निर्यात करें और गन्ना किसानों के बकाए का जल्द भुगतान हो।

सूत्र बताते हैं कि कैबिनेट मंत्रालय के जिस प्रस्ताव पर विचार करने वाली है, उसमें 50 लाख टन चीनी निर्यात पर छूट देने की सिफारिश शामिल है। माना जा रहा है कि प्रति क्विंटल के हिसाब से सब्सिडी देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा प्रति क्विंटल यातायात सब्सिडी को भी शामिल किया गया है। तटीय इलाके की मिलों के लिए ढाई रुपये और तट से दूर वाली मिलों के लिए 3 रुपए प्रति क्विंटल यातायात सब्सिडी मुहैया कराने का प्रस्ताव है।

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गौरतलब है कि निर्यात में कमी का कारण कच्ची चीनी उपलब्ध नहीं होना है, जबकि वैश्विक बाजार में इसकी मांग है। उद्योग ने मंत्रालय से समय सीमा बढ़ाने का आग्रह किया है। ताकि 2018-19 सीजन से प्राप्त नई कच्ची चीनी निर्यात की जा सके।

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सरकार ने चीनी के रिकॉर्ड उत्पादन 3.2 करोड़ टन के मद्देनजर मार्च में चीनी निर्यात को मंजूरी दी थी। इसकी वजह बंपर उत्पादन के कारण 2017-18 में चीनी का दाम घटना था। गन्ना किसानों का बकाया मई अंत में 23,232 करोड़ रुपए पर पहुंच गया था। सारे कदम नकदी समस्या से जूझ रही चीनी मिलों द्वारा गन्ना किसानों को जल्द भुगतान के लिए उठाए गए थे। साथ ही सरकार ने चीनी पर आयात शुल्क दोगुना कर 100 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही निर्यात शुल्क को समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा मिलों के लिए 20 लाख टन चीनी निर्यात को अनिवार्य किया गया है।

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