Monday , December 10 2018
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खेल मंत्री से लगाएंगे गुहार नहीं चुने गए तो लड़ेंगे अदालती लड़ाई

हमेशा की तरह राष्ट्रीय खेल पुरस्कार इस बार भी विवादों में घिरने जा रहे हैं। देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न नहीं दिए जाने पर पहलवान बजरंग पूनिया ने नाराजगी जताई है। बजरंग का कहना है कि उन्हें जब लगा कि वह इस अवार्ड के योग्य हो गए हैं तब उन्होंने पहली बार इसके लिए आवेदन किया। उनके अंक भी बन रहे थे बावजूद इसके उन्हें नजरअंदाज किया गया है। वह पहले खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से अवार्ड दिए जाने के लिए गुहार लगाएंगे। अगर फिर भी सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें हक की लड़ाई के लिए अदालत का सहारा लेना पड़ेगा।

खेल रत्न के लिए इस बार 17 खिलाडियों ने दावा ठोका था। कमेटी ने विराट कोहली और मीराबाई चानू का इस अवार्ड केलिए चयन किया है। बजरंग का कहना है कि उन्हें दूसरे नामों से दिक्कत नहीं है, लेकिन उन्हें उनका नाम नहीं चुने जाने पर बेहद हैरानी हुई है। वल्र्ड चैंपियनशिप के लिए बंगलूरू में तैयारियां कर रहे बजरंग का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि वह खेल मंत्री एक खिलाड़ी होने के नाते उनके साथ हुई नाइंसाफी को समझेंगे। वह बुधवार को दिल्ली आकर खेल मंत्री से मिलने की कोशिश करेंगे।

बजरंग के नहीं चुने जाने पर योगेश्वर भी हैरान 
बजरंग का कहना है कि खुद योगेश्वर दत्त को इस बात की हैरानी हुई है कि उन्हें पूरे अंक होने के बावजूद इस अवार्ड केलिए चुना गया है। योगेश्वर ने उनसे कहा है कि वह पहले खेल मंत्री से मिलें। अगर सुनवाई नहीं होती है तो अदालत से न्याय लिया जाएगा। बजरंग का कहना है कि वह अपने भार वर्ग 65 किलो में वर्ल्ड नंबर एक बनने वाले हैं। बजरंग का कहना है कि वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य जीत चुके हैं। राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों का स्वर्ण और रजक पदक उनके नाम है। एशियाई चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप का स्वर्ण भी वह जीत चुके हैं। एशियाई इंडोर खेलों के स्वर्ण पर भी वह हाथ फेर चुके हैं। ऐसे में उनकी खेल रत्न के लिए पूरी दावेदारी बनती थी।

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