Thursday , December 13 2018
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भाजपा राज्य में विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही : प्रदेश प्रवक्ता

छत्तीसगढ़ भाजपा के चुनावी सर्वे में भाजपा के दो दिग्गज मंत्रियों का नेतृत्व कम होता नजर आ रहा है। ये मंत्री हैं रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक बृजमोहन अग्रवाल और रायपुर पश्चिम से विधायक राजेश मूणत। दोनों ही रमन कैबिनेट में मंत्री हैं और संगठन में भी खासा रुतबा रखते हैं।

रायपुर में चार विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से तीन पर भाजपा के विधायक हैं, एक सीट कांग्रेस के पास है। भाजपा के हालिया सर्वे में रायपुर की दो सीटों पर जनता में खासी नाराजगी है और इसका खामियाजा भाजपा को विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

नगर निगम की लापरवाही का हर्जाना भुगत सकती है भाजपा

जनता की नाराजगी का कारण सुनकर भाजपा भी आश्चर्य में है। दरअसल लोग सीधे तौर पर मंत्रियों से नाराज नहीं हैं, बल्कि उनकी शिकायत नगर निगम रायपुर से है। लोगों का कहना है कि गंदगी, आवारा पशु और शहर की सड़कों की बेहाल हालत के कारण वे अपने विधायकों के खिलाफ वोट देने का मन बना रहे हैं। पिछले 17 वर्षों में रायपुर के 70 वार्डों में सफाई के लिए ही कोई व्यवस्था न कर पाना नगर निगम के लिए सिरदर्द बन गया है। रायपुर उत्तर से भाजपा विधायक श्रीचंद सुंदरानी भी मानते हैं कि नगर निगम की लापरवाही का खामियाजा जनता भुगत रही है और इससे हमारी पार्टी को भी नुकसान पहुंच सकता है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव का कहना है कि नगर निगम की लापरवाही जनता के मन में भाजपा के प्रति नाराजगी पैदा कर रही है। यह चिंतनीय विषय है। राज्य की भाजपा सरकार शहरों की स्थिति सुधारने पर करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन रायपुर नगर निगम के कारण कहीं-कहीं लोग परेशान हैं।

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रायपुर नगर निगम के कमिश्रनर रजत बंसल ने कहा कि हमने सफाई व्यव्स्था को लेकर एक व्यवस्था लागू की है। शहर के 70 वार्डों में से 40 वार्डों में यह व्यवस्था सुचारु रूप से लागू हो गई है। हालांकि, शहर के लगभग हर इलाके में लोगों पर हमला कर रही आवारा कुत्तों की टोली और गायों के झुंड के सवाल पर उन्होंने कोई ठोस जवाब नहीं दिया।

सर्वे में कम होता दिख रहा जीत-हार का अंतर

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कैबिनेट मंत्री बृजमोहन अग्रवाल छह बार से विधायक हैं। वे लगातार बेहतर अंतर से चुनाव जीतते आए हैं। उन्होंने रायपुर दक्षिण से 2008 में 24 हजार और 2013 में 34 हजार वोट से चुनाव जीता था। इस सीट को भाजपा का अभेद किला माना जाता है। इसके बावजूद  इस बार कांग्रेस के तीन दर्जन नेता चुनौती देने को तैयार हैं। वहीं राजेश मूणत 2003 में पहली बार विधायक बने और उन्हें रमन कैबिनेट का हिस्सा बनने का मौका मिला। वर्ष 2008 और 2013 में भी वे विधायक बनकर कैबिनेट मंत्री बने। वर्ष 2013 में कांग्रे के विकास उपाध्याय को उन्होंने 6500 वोट से हराया था। इस बार भाजपा के सर्वे में यह अंतर और कम होता दिख रहा है।

बहरहाल, भाजपा शहर की हालत बिगाड़ने के जिम्मेदार नगर निगम को दुरुस्त करने के लिए अपनी ही सरकार के मुखिया डॉ रमन सिंह की शरण में जाती है या खुद मंत्रियों को अपनी स्थिति दुरस्त करने के निर्देश देती है, यह देखने वाली बात होगी।

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