Wednesday , November 21 2018
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ब्रिटिश कंपनी मोंडेलेज कैडबरी चॉकलेट

अगले साल मार्च में होने वाले ब्रेग्जिट को लेकर यूरोप के बाजार और अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का दौर कायम है। इस के मद्देनजर कैडबरी चॉकलेट बनाने वाली ब्रिटेन की कंपनी मोंडेलेज इंटरनेशनल इन दिनों कैडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट बार, बिस्किट, टॉब्लेरॉन और मिनी एग समेत इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल को बड़ी मात्रा में जमा करके रख रही है। मोंडेलेज ऐसा इसलिए कर रही है ताकि ब्रेग्जिट की वजह से इनकी सप्लाई और कंपनी के कारोबार पर असर न पड़े।
मोंडेलेज (कैडबरी की पेरेंट कंपनी) यूरोप के प्रेसिडेंट हबर्ट वेबर का कहना है कि अभी तक ब्रिटेन और बाकी यूरोप के बीच कोई डील नहीं हुई है। ‘नो-डील’ की इस स्थिति में कंपनी एहतियात के तौर पर चॉकलेट बार, बिस्किट और बेकिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जमा कर रही है।

दरअसल मार्च 2019 में ब्रिटेन तय समझौते के तहत यूरोपियन यूनियन से बाहर निकल जाएगा। इस ऐतिहासिक कदम को लेकर बड़ी कंपनियां तैयारियों में जुट गई हैं। ब्रिटिश निर्माताओं द्वारा इस्तेमाल होने वाली शुगर, कोको व गेहूं से निर्मित वस्तुओं का बड़ा हिस्सा यूरोपीय संघ (ईयू) से ही आयात किया जाता है। कंपनियों को चिंता है कि सामग्री की कमी से उत्पादन में कमी न आ जाए। कैडबरी के लिए कोको की प्रोसेसिंग चिर्क (वेल्स) में होती है।

वहीं, मार्लब्रुक (हरफोर्डशायर) में चॉकलेट का बेस बनाने दूध व शुगर मिलाई जाती है। दूध का इंतजाम स्थानीय स्तर पर ही किया जाता है। वेबर का कहना है कि खाद्य सामग्री के मामले में ब्रिटेन आत्मनिर्भर नहीं है, हमें इस चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

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कई क्षेत्र की कंपनियां जमा कर रही हैं स्टॉक

फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कंपनियां भी स्टॉक जमा करने में जुट गई हैं। ब्रेक्सिट के लिए ब्रिटिश कंपनियों की मदद करने वाली कसंल्टेसी फर्म वेंडिजिटल के मार्क वाटरमैन का कहना है कि ब्रेग्जिट के बाद बिजनेस की अनिश्चितता को लेकर कंपनियां चिंतित हैं।

उन्हें लगता है कि स्टॉक जमा करने से उनकी मुश्किल कुछ कम हो सकेगी। ब्रिटेन के सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च के मुताबिक अगर कंपनियां तीन महीने का स्टॉक जमा करती हैं तो ब्रिटेन का आयात बढ़कर 3.56 लाख करोड़ रु. हो सकता है।

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