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कैंप डेविड में डोनाल्ड ट्रंप के साथ डिनर करना चाहते हैं प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चाहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ कैंप डेविड में डिनर करने की है। कैंप डेविड करीब आधी शताब्दी से अमेरिकी राष्ट्रपतियों के एकांतवास में रहने और बहुत ही खास विदेशी मेहमानों से मिलने का केंद्र रहा है। मोदी का मकसद इसके जरिए राष्ट्रपति ट्रंप के साथ व्यक्तिगत दोस्ती को मजबूत करना है। ये दावा मशहूर अमेरिकी लेखक बॉब वुडवर्ड ने अपनी हालिया किताब में किया, जिससे तहलका मच गया है।
हालांकि व्हाइट हाउस की तरफ से इस काल्पनिक कहानी वाली किताब घोषित किया जा चुका है। इस किताब के छोटे से हिस्से में भारत और 26 जून, 2017 को व्हाइट हाउस में मोदी के आगमन का जिक्र किया गया है। ‘फियर : ट्रंप इन द व्हाइट हाउस’ नाम की इस किताब को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप मजाक कहकर खारिज कर चुके हैं।

लेखक ने दावा किया है कि 448 पन्नों की इस किताब में ट्रंप के कार्यकाल में व्हाइट हाउस की पूरी कार्यप्रणाली और फैसले लेने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई है। किताब में कहा गया है कि मोदी के दौरे के समय ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे एचआर मैकमास्टर भारत के साथ मजबूत रिश्ते बनाने के पक्ष में थे।

उन्होंने पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखने के लिए भारत के सामरिक महत्व के आधार पर मोदी के दौरे से चंद दिन पहले व्हाइट हाउस के तत्कालीन चीफ ऑफ स्टाफ आर. प्रिबस को उनके स्वागत की तैयारी कैंप डेविड में करने के लिए कहा था। लेकिन प्रिबस ने ट्रंप के मोदी से व्हाइट हाउस में ही मिलने की इच्छा जताने की बात कहकर मैकमास्टर का आग्रह ठुकरा दिया था। किताब के अनुसार, इस बात पर मैकमास्टर बेहद नाराज भी हुए थे।

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मोदी मेरे दोस्त हैं : ट्रंप

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वुडवर्ड ने अपनी किताब में ये भी कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र करते हुए कहा, भारत के प्रधानमंत्री मोदी मेरे दोस्त हैं और मैं उन्हें बेहद पसंद करता हूं। वुडवर्ड के अनुसार, ट्रंप ने ये कमेंट 19 जुलाई को एक बैठक के दौरान किया था। ट्रंप ने कहा था, मोदी ने मुझे बताया कि अमेरिका को अफगानिस्तान में कुछ भी नहीं मिला।

अफगानिस्तान में खनिजों का अथाह भंडार है। हमने उसे चीन जैसों की तरह नहीं लिया। ट्रंप ने आगे कहा, अफगानिस्तान के कीमती खनिजों में से अपने समर्थन के बदले अमेरिका को कुछ हिस्से की जरूरत है। मैं खनिज पाने से पहले कोई समझौता नहीं करूंगा और अमेरिका पाकिस्तान का पेमेंट भी तब तक रोकेगा, जब तक कि वह सहयोग नहीं करता।

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