Friday , September 21 2018
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भारत में जन्मी राजलक्ष्मी को मिलेगा प्रतिष्ठित ‘यंग स्कॉलर’ अवार्ड

भारत में जन्मी राजलक्ष्मी नंदकुमार को स्मार्टफोन का इस्तेमाल करके घातक स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने में अभूतपूर्व मदद को लेकर प्रतिष्ठित ‘यंग स्कॉलर’ अवार्ड के लिए चुना गया है।

राजलक्ष्मी वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में पढ़ रही हैं। उन्हें 2018 के मार्कोनी सोसायटी पॉल बेरेन यंग स्कॉलर अवार्ड के लिए चुना गया है। उन्होंने ऐसी तकनीक विकसित की है जिसकी मदद से एक साधारण स्मार्टफोन को शारीरिक गतिविधियों का पता लगाने में सक्षम एक सक्रिय सोनार सिस्टम में तब्दील किया जा सकता है।

इस तकनीक से डिवाइस के साथ बिना शारीरिक संपर्क के शरीर में होने वाली गति और श्वसन जैसी शारीरिक गतिविधियों की प्रक्रिया को भांपकर बीमारी का पता लगाया जाता है।

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राजलक्ष्मी ने चेन्नई से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की है। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया के लिए भी काम किया है। उन्हें इस अवार्ड के अंतर्गत 5000 अमेरिकी डॉलर की रकम मिलेगी। उनके माता-पिता मूल रूप से मदुरै के रहने वाले हैं।

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नई तकनीक ऐसे करती है काम

राजलक्ष्मी ने इस तकनीक के लिए चमगादड़ों द्वारा काम में लाई जाने वाली प्रणाली का इस्तेमाल किया। दरअसल, चमगादड़ अंधेरे में सोनार तकनीक का उपयोग करते हैं। इसमें वे ध्वनिक सिग्नल भेजकर परावर्तित प्रतिबिंबों के आधार पर वस्तुओं की पहचान करते हैं। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, राजलक्ष्मी द्वारा विकसित की गई प्रणाली, फोन के स्पीकर से अश्रव्य ध्वनि संकेतों को प्रसारित करती है। फिर मानव शरीर से परावर्तित प्रतिबिंबों को ट्रैक करके इनका विश्लेषण करने के बाद परिणाम देती है।

‘मैं फिजियोलॉजिकल सिग्नल्स का पता लगाने के तरीकों के बारे में पता लगाना चाहती थी। ऐसा इसलिए क्योंकि ये हेल्थकेयर एप्लीकेशन के लिए सबसे ज्याद इस्तेमाल किए जाने वाले सिग्नल हैं।’

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