Wednesday , November 14 2018
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पिछले साल जीरो इस साल 12 अवार्ड किए नाम

ग्रामीण विकास मंत्रालय के राष्ट्रीय पुरस्कारों में यूपी का जलवा सबके सिर चढ़ बोला। इसमें यूपी ने विभिन्न कैटेगरी में एक दर्जन पुरस्कार हासिल किए हैं। जबकि पिछले साल उसका प्रदर्शन शून्य था। अमूमन इस तरह के पुरस्कारों में अव्वल रहने वाले पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों के दबदबे को कम करके इस बार बाजी मारी छत्तीसगढ़ ने और सबसे ज्यादा पुरस्कार जीत कर अपनी सर्वोच्चता बनायी।

लक्षदीप को सबसे कम केवल एक पुरस्कार मिला।  विज्ञान भवन में हुए कार्यक्रम में 237 पुरस्कार वितरित किए गए। इसमें छत्तीसगढ़ ने सबसे ज्यादा 17 पुरस्कार  जीते उसे देश भर में गांवों को शहरों की तर्ज पर संवारने में पहला स्थान मिला। इसी क्रम में रोजगार देने में उसने पहला और दूसरा दोनों स्थान प्राप्त किया।

पूरे समारोह में  फर्श से अर्श पर पहुंचे  यूपी का परचम बुलंद करने के लिए प्रदेश केग्रामीण विकास मंत्री महेंद सिंह खुद विज्ञान भवन पहुंचे थे। यूपी को मिले पुरस्कारों में अहम रहा उसके तीनो ब्लॉक देश भर में सभी मानकों में ग्रामीण विकास करने में सफल रहे यह ब्लॉक हैं।  बिजनौर का अफजल गढ़, जेपी नगर में धनौरा और ज्योया, इसी क्रम में आगे बढ़े तो ओवरआल परफारमेंस में  उसे तीसरा स्थान मिला। जबकि जिलों में प्रदेश थोड़ा पिछड़ा है। ग्राम स्वराज और एक्सटेंशन ग्राम स्वराज अभियान में भी लखनऊ और सीतापुर को  अवार्ड मिला है। इसके अलावा उसके राजकीय ग्रामीण प्रशिक्षण संस्थान  को भी पहला स्थान मिला है।

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इस दफा से पहली बार मंत्रालय ने विस्तारित ग्राम स्वराज अभियान से जुड़े अफसरों को भी सम्मानित किया है। इसमें छह जिलों में विस्तारित ग्राम समाज अभियान को सफल बनाने में  उधम सिंह नगर के प्रभारी सुखबीर सिंह संधु, कश्मीर के बारामूला के प्रभारी अफसर अरूण कुमार मेहता, मणिपुर चंदेल में सराहनीय काम के लिए संयुक्त सचिव एस के देव बर्मन और बिहार के गया में सबसे ज्यादा गांव को संतृप्त करने के लिए प्रभारी अफसर बिंबाधर प्रधान को सम्मानित किया गया।

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इसके अलावा मंत्रालय से संयुक्त सचिव प्रशांत कुमार, अतुल कुमार, गया प्रसाद और प्रशांत मित्तल को भी सम्मानित किया गया।  मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं को  लागू कराने में पिछले एक साल में राज्य, जिलों प्रखंडों संगठनों और व्यक्तिगत तौर पर किए गए असाधारण कार्यों केलिए ग्रामीण विकास मंत्रालय राष्ट्रीय पुरस्कार देता है। इसमें ग्रामीण विकास मंत्रालय की 13 योजनाओं और ग्राम स्वराज एवं विस्तारित ग्राम स्वराज योजना की सात योजनाओं के लिए पुरस्कार दिए गए।

ग्रामीण विकास मंत्रालय राष्ट्रीय पुरस्कारों में धड़ाधड़ पुरस्कार हासिल करके यूपी ने बीमारू राज्य की छवि को तोडने का काम किया है।  यह दावा है यूपी केग्रामीण विकास राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉक्टर महेंद्र सिंह का । सिंह का कहना है कि सत्ता परिवर्तन से व्यवस्था परिवर्तन की ओर ले जाने के लिए एक सरकार बनी है।  जिसमें मुख्यमंत्री ने एक मैकेनिज्म तैयार किया है। जिसमें संकल्प शक्ति है। व्यवस्था परिवर्तन केलिए अच्छी सोच है। जिसका नतीजा कल हम सिफर थे आज शीर्ष की ओर बढ़ रहेहैं।

हमें एक साल में आठ लाख घर बनाने केबाद अब चार लाख घर बनाने का लक्ष्य मिला है। जिसे हम कोशिश कर रहे हैं कि तय समय से पहले ही पूरा कर लेंगे। इस अक्टूबर तक दो लाख और घर बनाकर दे देंगे।  जिलों में और मनरेगा में अभी हम कोशिश कर रहे  काम की गुंजाइश है। वैसे  फिलहाल प्रदेश में अभूतपूर्व काम हो रहे है। जब सत्ता मिली तो मनरेगा पर सीबीआई जांच चल रही थी  पहले की सरकारों ने इसे भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया था । अब हमने इसे विकास का केंद्र बना दिया है। ग्रामीण सड़क हो पीएम आवास योजना हो, अगले साल हम लगभग दो दर्जन पुरस्कार लेकर जाने के लक्ष्य को लेकर यहां से जा रहे हैं।

विकास और योजनाओं को प्रदेश में लागू करने में हमें जो भी सहयोग मिलेगा हम सबका सम्मान  करेंगे।  प्रदेश में खासतौर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय में हम सबका सम्मान अधिक से अधिक काम के मंत्र के साथ काम कर रहे हैं। यूपी मोदी जी के सपने पर काम कर रहा है। इसमें हर गरीब का घर और रोजगार देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। इसे पूरा करने के लिए हम तत्पर हैं।

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