Monday , September 24 2018
Loading...
Breaking News

35-ए के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार

पीडीपी प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि उनकी पार्टी राज्य के विशेष दर्जे से संबंधित अनुच्छेद 35-ए जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, को बचाने के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार है। पार्टी इसे बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

गांदरबल जिले के कंगन में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से उन्होंने कहा कि उनकी जब सरकार थी तो उन्होंने देश के टाप वकीलों को अनुच्छेद 35-ए को बचाने के लिए लगाया था। भविष्य में भी जो कुछ संभव होगा वह स्वयं व उनकी पार्टी करेगी। उन्होंने कहा कि रियासत में शांति के लिए भारत को पाकिस्तान के दोस्ती के आफर का सकारात्मक जवाब देना चाहिए। मुफ्ती साहब हमेशा कहते थे कि वे मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक नहीं हैं, बल्कि यहां की जनता को मौजूदा परिस्थितियों से बाहर निकलना होगा।

इसके लिए वाजपेयी जी के कार्यकाल में सबसे पहले प्रयास हुए। फिर मोदी जी के कार्यकाल में भाजपा के साथ गठबंधन किया गया। कोशिश की गई कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते अच्छे हों। रियासत में भी बातचीत का सिलसिला शुरू हो। उन्होंने कहा कि दिल्ली को भी चाहिए कि वाजपेयी के फार्मूले पर चलकर पाकिस्तान के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाए। साथ ही यहां भी बातचीत का सिलसिला शुरू हो ताकि कश्मीरियों के जख्म पर लग सके।

Loading...

सभी को सुरक्षा दे पाना संभव नहीं होगा

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि निकाय व पंचायत चुनाव पर बात चल रही है। उनकी सरकार ने भी सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। तब सर्वसम्मति बनी थी कि हालात चुनाव के लायक नहीं हैं। सभी को सुरक्षा दे पाना संभव नहीं होगा। उम्मीद है कि गवर्नर भी सर्वदलीय बैठक बुलाकर हालात पर चर्चा करेंगे और तब फैसला करेंगे। लेकिन समस्या यह है कि 35-ए को मिला दिया गया। कोर्ट में कहा गया कि 35-ए पर सुनवाई टाल दी जाए क्योंकि पंचायत चुनाव होने हैं। इससे समस्या और पैदा हो गई और लोगों में शक पैदा हुआ।

महबूबा ने दक्षिणी कश्मीर जो पीडीपी का गढ़ है वहां हालात खराब होने के सवाल पर कहा कि यह केवल दक्षिणी कश्मीर की बात नहीं है। पूरी रियासत में जब तक पालीटिकल प्रोसेस शुरू नहीं होगा, बातचीत का सिलसिला शुरू नहीं होगा तब तक स्थिति नहीं बदलेगी। सीजफायर किया गया था और उसके बाद गृह मंत्री ने बातचीत का न्योता दिया था। लेकिन यह किन्हीं वजहों से रूक गया। इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। इमरान खान के दोस्ती का जवाब हाथ बढ़ाकर देना चाहिए तभी जम्मू कश्मीर में अमन तथा शांति होगा।

Loading...
loading...