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अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रुपया

गुरुवार को रुपये में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। डॉलर के मुकाबले रुपये रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। अब एक डॉलर की कीमत 72 रूपये के पार हो गई है। रुपया गुरुवार को कारोबार में 37 पैसे की तेज गिरावट के साथ पहली बार प्रति डालर 72 के नीचे चला गया। दोपहर बाद रुपए की विनिमय दर 72.12 रुपए प्रति डालर पर चल रही थी। यह बुधवार के बंद की तुलना में 37 पैसे की गिरावट दर्शाता है।इस गिरावट की वजह आर्थिक संकट और कमजोर ग्लोबल संकेतों को माना जा रहा है। विदेशी विनिमय बाजार में शुरुआती कारोबार में 9 पैसे मजबूती के साथ 71.66 प्रति डॉलर पर खुला, लेकिन दोपहर में 0.43% गिरकर 72.0650 स्तर तक पहुंच गया।

डीलरों के मुताबिक निवेशक वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डालर में तेजी के बीच भारतीय पूंजी बाजार से विदेशी निवेश की निकासी से चिंतित है। विदेशी विनिमय बाजार में रुपया आरंभ में 9 पैसे मजबूती के साथ 71.66 प्रति डालर पर चल रहा था।

डीलरों के मुताबिक शुरू में निर्यातकों और बैंकों ने डालर की बिकवाली बढ़ा रखी थी। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दामों में नरमी से भी रुपये को लेकर धारणा सुधरी लग रही थी। बुधवार को रुपया 17 पैसे गिर कर 71.75 प्रति डालर के नए न्यूनतम स्तर पर बंद हुआ था। मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 37 पैसे टूटकर 71.58 पर बंद हुआ था। जिस तरह से वैश्विक मंदी देखी जा रही है ऐसे में विशेषज्ञ पहले ही संभावना जता चुके हैं कि रुपया 70 के स्तर पर पर पहुंच सकता है।

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इससे पहले रुपये में गिरवाट 19 जुलाई को को देखने को मिली थी। इस दौरान रुपये ने 69 का आंकड़ा छुआ था।

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डॉलर की डिमांड बढ़ने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये को कमजोर किया था। 69 का स्तर छूने से एक दिन पहले रुपये ने 19 पैसे की गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की थी। 18 जुलाई को यह 68.43 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर खुला था।

विशेषज्ञों की माने तो अभी रुपये में दबाव बना रहेगा। लगातार डॉलर में आ रही मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में जारी उथल-पुथल और विदेशी निवेश प्रवाह में कमी रुपये में गिरावट के लिए जिम्मेदार है।

सरकार नहीं उठाएगी कोई कदम

इस बीच वित्त मंत्रालय के अफसर ने संकेत दिए कि सरकार रुपए में गिरावट को रोकने के लिए कदम नहीं उठाएगी। 2013 में 5 माह में 30% कमजोर हुआ था। रुपये को 64 से 71 तक आने में 8 महीने लगे। लेकिन 2013 में यह 5 महीने में ही 53 से 69 तक पहुंच गया था। इसलिए जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य रणनीतिकार आनंद जेम्स ने कहा कि एक डॉलर की कीमत 73 तक जा सकती है।

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