Wednesday , September 26 2018
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फर्जी व्हाट्स एप चैट वायरल करने वाले पर मुकदमा

वायरल व्हाट्स एप चैट के जरिये इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू की छवि खराब किए जाने की साजिश के मामले में इविवि प्रशासन ने मुकदमा कर्नलगंज थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया है। पुलिस ने इविवि के पूर्व छात्र अविनाश दुबे के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। वहीं, इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (ऑटा) के पदाधिकारियों ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र भेजकर मामले में दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

बुधवार को इविवि के एक पूर्व छात्र ने फेसबुक पर विवादित व्हाट्स एप चैट को वायरल कर दिया था। इस पर कुलपति की डीपी और उनका व्हाट्स एप नंबर दर्शाया गया था। साथ ही किसी महिला से हुई बातचीत की कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां थीं। इस पूरे मामले को इविवि प्रशासन ने गंभीरता से लिया। बृहस्पतिवार को इविवि के रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने चीफ प्रॉक्टर को पत्र लिखकर कहा कि पूर्व छात्र अविनाश दुबे ने अपने मोबाइल से व्हाट्स एप का फर्जी स्क्रीनशॉट तैयार कर उसे फेसबुक पर वायरल कर दिया। फर्जी व्हाट्स एप चैट को वायरल कर कुलपति की छवि एवं सामाजिक प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाई गई।

रजिस्ट्रार ने पत्र में कहा है कि अविनाश दुबे के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति कुलपति या विश्वविद्यालय की छवि धूमिक करने की चेष्टा न कर सके। इस पत्र के आधार पर चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे ने एफआईआर दर्ज कराने के लिए कर्नलगंज थाने में तहरीर दे दी और पुलिस ने देर रात अविनाश दुबे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके साथ ही चीफ प्रॉक्टर ने बतौर ऑटा अध्यक्ष प्रदेश के पुलिस महानिदेशक  को भी पत्र भेजकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनके साथ वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी, उपाध्यक्ष प्रो. लालसा यादव, महमंत्री प्रो. शिवमोहन प्रसाद ने भी डीजीपी को पत्र लिखा है और इसे पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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सवाल उठ रहा है कि कुलपति की छवि खराब करने के पीछे आखिर किसकी भूमिका है? विश्वविद्यालय में भूमिका को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। अभी कोई इस बारे में बोलने को तैयार नहीं है कि भूमिका किसकी है और क्या है? छात्रसंघ अध्यक्ष अवनीश यादव का कहना है कि यह बेहद गंभीर मामला है। इसकी तत्काल सक्षम संस्था से जांच कराई जानी चाहिए और यह सामने आना चाहिए कि इसके पीछे किसकी  भूमिका है। कुलपति का पद बेहद गरिमापूर्ण है। अध्यक्ष का कहना है कि इस तरह के आरोपों के बीच प्रो. हांगलू को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उधर, छात्र संघर्ष मोर्चा के आनंद सिंह निक्कू का कहना है कि इस पूरे मामले में किसी एक पूर्व छात्र को दोषी ठहराकर विश्वविद्यालय प्रशासन पल्ला नहीं झाड़ सकता। इसके पीछे कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी हो सकती है, सो इस मामले की सीबीआई या सीबीसीआईडी से जांच कराई जानी चाहिए।

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