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अमेरिका की नाराजगी के बावजूद इस काम में जुटा भारत

जहां एक तरफ भारत और अमेरिका के बीच 2 प्लस 2 वार्ता हो रही है। वहीं इसी बीच ईरान का एक प्रतिनिधिमंडल भारत के साथ वार्ता करने के लिए दिल्ली पहुंचा गया है ताकि रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह के भुगतान तंत्र पर काम हो सके। इसके अलावा ईरान ने भारी रेलवे और इंजीनियरिंग उपकरणों को भारत से खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।

यूको बैंक और बैंक प्रसारगड़ के बीच भुगतान तंत्र के लिए तालमेल बनाने की बात चल रही है। इससे ईरान के खिलाफ अमेरिकी संचालित प्रतिबंधों को रोकने में और कच्चे तेलों की कीमत को भी कम करने में मदद मिलेगी। हाल ही में ईरान के एक बैंक को भारत में अपनी शाखा खोलने की मंजूरी मिल गई है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृ्त्व परिवहन मंत्री अब्बास अहमद अखौंदी कर रहे थे, जिन्होंने परिवहन और नौवहन मंत्री नितिन गडकरी को यह आश्वासन दिया है कि जल्द ही चाबहार बंगरगाह को भारत को सौंप दिया जाएगा।

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बैठक के बाद गडकरी ने कहा कि बंदरगाह परियोजना को प्रतिंबध लगाए जाने से काफी पहले बनाया और कल्पना की गई थी। अफगानिस्तान के लिए प्रवेश द्वार कहे जाने वाले चाबहार बंदरगाह के लिए पहली मुश्किल ईरान सरकार का इस बात पर जोर देना है कि आतंरिक संचालन के लिए डॉलर 3.5 मिलियन के प्रदर्शन की गारंटी दी जाए। भारतीय अधिकारी इस शर्त से छूट चाहते हैं क्योंकि वर्तमान प्रतिबंधों के लिहाज से ऐसी गारंटी देना मुश्किल है।

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दूसरा मसला बंदरगाह पर दो बर्थ संचालित करने के लिए बैंक गारंटी प्रदान करने की आवश्यकता जिसके लिए उपकरणों का आदेश दे दिया गया है। इसके लिए यूको बैंक और बैंक पसारगढ़ के बीच महत्वपूर्ण समझौता होना है। इस साझेदारी के जरिए एक भुगतान तंत्र बनाया जाएगा जिससे ईरान से खरीदे गए तेल का भुगतान होगा। वहीं भारतीय चावल और इंजीनियरिंग सामान के निर्यात का भी भुगतान होगा।

अमेरिकी प्रतिबंधो से पूर्व इसी तरह का तंत्र स्थापित करने की योजना थी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय लोकोमोटिव्स, रेल और सिग्नलिंग सिस्टम और इंजीनियरिंग सामानों और भेल द्वारा बनाए गए जनरेटर्स को खरीदने में भी अपनी दिलचस्पी दिखाई है। शुक्रवार को अखौंदी वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु के साथ मुलाकात करेंगे। जहां व्यापार संबंधी नई संभावनाओं पर बातचीत होगी।

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