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आम्रपाली समूह की 16 संपत्तियां होंगी नीलाम

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को आम्रपाली समूह की 16 संपत्तियों को नीलाम करने का आदेश दिया है। इन संपत्तियों को एनबीसीसी के माध्यम से बेचा जाएगा। साथ ही शीर्ष अदालत ने कंपनी और उसके निदेशकों के वित्तीय लेनदेन का फोरेंसिक ऑडिट कराने का भी आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने समूह की 16 संपत्तियों को बेचने का निर्णय लिया है, जिससे कि अधूरी पड़ी परियोजनाओं की शुरुआत हो सके। नोएडा, ग्रेटर नोएडा के अलावा वृंदावन, बरेली, इंदौर आदि जगहों की ये संपत्तियां हैं। पीठ ने कहा कि हम चाहते हैं कि इन संपत्तियों को एनबीसीसी द्वारा बेचा जाए क्योंकि वह भरोसेमंद है और फ्लैट खरीदारों को उन पर भरोसा भी है।

सुनवाई के दौरान एनबीसीसी ने कहा कि वह रुके हुए 15 प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू कर सकता है, अगर उसे शुरुआत में 1000 करोड़ रुपये मुहैया कराए जाए और इसके बाद हर तिमाही 250 करोड़ रुपये दिए जाए। पीठ ने आम्रपाली की 46 कंपनियों और उसके निदेशक व प्रमोटर्स द्वारा वर्ष 2008 से लेकर अब तक किए गए तमाम वित्तीय लेन-देन की फोरेंसिक ऑडिट दो महीने में पूरा करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

847 करोड़ से गिरकर 67 करोड़ की कैसे हुईं संपत्तियां

आम्रपाली समूह के सीएमडी अनिल शर्मा मुश्किल में पड़ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि 2014 में अनिल शर्मा ने जदयू की टिकट पर बिहार के जहानाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। तब हलफनामे में उन्होंने अपनी संपत्ति 847 करोड़ रुपये बताई थी, लेकिन अब उनका कहना है कि उनकी संपत्ति महज 67 करोड़ रुपये हैं।

पीठ ने शर्मा से पूछा कि आखिर कैसे चार साल में उनकी संपत्तियां 847 करोड़ रुपये से गिरकर 67 करोड़ रुपये की हो गई। पीठ ने शर्मा को जवाब दाखिल करने को कहा है। पीठ ने शर्मा से कहा कि फिलहाल वह उनकी संपत्तियों की लेकर जांच नहीं करने जा रहे हैं, लेकिन भविष्य में जरूर की जाएगी।

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