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दाऊद पर शिकंजा कसने के लिए तैयार हुआ अमेरिका

1993 मुंबई के सीरियल बम धमाकों का मास्टरमाइंड और अंडरवर्ल्ड दाऊद इब्राहिम और उसकी डी कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने पर अमेरिका राजी हो गया है। टू प्लस टू वार्ता के दौरान अमेरिका ने डी कंपनी, अल कायदा, आईएसआईएस, लश्कर ए ताइबा, जैश ए मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन, हक्कानी नेटवर्क, तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान और इनके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में इन आतंकी गुटों के खिलाफ कार्रवाई के लिहाज से वर्ष 2017 में शुरू की गई द्विपक्षीय वार्ता का जिक्र किया गया है।

दाऊद इब्राहिम भारत का मोस्टवांटेड अपराधी है। मुंबई बम धमाकों के बाद वह भागकर पाकिस्तान में जा छिपा था। तब से वह वहीं से अपने काले कारोबार का संचालन कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दाऊद के खिलाफ खुफिया जानकारियों को साझा करना भारत के लिए अभी काफी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि इससे डी-कंपनी में मौजूद सूत्रों की जान खतरे में पड़ सकती थी लेकिन अब द्विपक्षीय प्लेटफार्म पर इस तरह की सहमति बनने से सभी जानकारियां अमेरिका को साझा की जा सकेंगी। दाऊद और उसके साथियों की काफी संपत्तियां अमेरिका में भी हैं और भारत की सूचना पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

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अमेरिका और भारत ने 2 प्लस 2 वार्ता के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में दो बार पाकिस्तान का जिक्र है। पहले सीमापार से होने वाले आतंक के संदर्भ में और दूसरा मुंबई में हुए 26/11 हमलों के प्रकरण पर। इससे यह उम्मीद जगी है कि ट्रंप प्रशासन भारत के पड़ोसी देश पर आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राजनयिक दबाव बनाएगा।

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टू प्लस टू वार्ता विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच अपने अमेरिकी समकक्षों माइकल आर पॉम्पियो और जेम्स एन मैटिस के साथ नई दिल्ली में हुई। दोनों ही देशों ने पाकिस्तान को सख्ती से सीमापार आतंक को खत्म करने के लिए बहुत से कदम उठाने के लिए कहा। स्वराज ने कहा, ‘भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दक्षिण एशिया नीति का समर्थन करती है। उनका पाकिस्तान को सीमापार आतंकवाद को खत्म करने का आह्वान करने का भारत अनुनाद करता है।’

संयुक्त बयान में पाकिस्तान को सीमापार आतंकवाद का जिक्र करना इस बात का सूचक है कि पड़ोसी देश लगातार अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी हमले करने के लिए उपयोग कर रहा है। संयुक्त बयान में दो बार पाकिस्तान का संदर्भ है, जिसमें देश से उन आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया जो भारत को लक्षित करते हैं। 2016 के इसी तरह के बयान में केवल एक बार पाकिस्तान का जिक्र किया गया था।

बैठक के बाद जारी किए गए बयान में कहा गया है कि ज्ञात या संदिग्ध आतंकवादियों पर सूचना साझा करने के प्रयास को बढ़ाया जाएगा। स्वराज ने कहा, ‘भारत और अमेरिका के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग में एक नई गुणात्मक बढ़त और उद्देश्य हासिल किया है। हम संयुक्त राष्ट्र और वित्तीय कार्य टास्क फोर्स जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों में संबंधों को गहरा बनाने पर सहमत हुए हैं।’

बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान इस बात को सुनिश्चित करे कि उसकी जमीन का इस्तेमाल आतंकी दूसरे देशों के खिलाफ हमले करने के लिए ना करें। मुंबई हमलों के 10 साल पूरे होने के मौके पर पाकिस्तान से कहा गया है कि वह मुंबई, पठानकोट, उड़ी और दूसरे सीमापार हमलों के गुनहगारों को सजा दे। बता दें कि मुंबई में हुए हमलों में 166 लोग मारे गए थे जिसमें 6 अमेरिकी नागरिक थे। दोनों देशों ने अलकायदा, आईएसआईएस, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल-मुजाहिद्दीन, हक्कानी नेचवर्क, तहरीक-ए-तालिबान, डी पंकनी और दूसरे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सहयोग को मजबूत करने की बात कही है।

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