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व्यापमं के बाद शिव’राज’ में 3000 करोड़ का एक और बड़ा घोटाला

मध्य प्रदेश में व्यापमं घोटाले के बाद अब एक और बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने शिवराज सरकार की नींद उड़ा दी है। बताया जा रहा है कि यह घोटाला तीन हजार करोड़ रुपये का है। ई-टेंडर घोटाले के तहत सरकार पर कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप है।

जानकारी के मुताबिक, ऑनलाइन प्रक्रिया में छेड़छाड़ कर इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है। आशंका है कि यह घोटाला कई सालों से चल रहा था, जिसका खुलासा इसी साल मई महीने में हुआ है।

बताया जा रहा है कि जो अधिकारी इस घोटाले की जांच कर रहा था, उसे जांच से हटाकर किसी और अधिकारी को यह सौंप दी गई है। इससे निष्पक्ष जांच पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। बता दें कि मध्य प्रदेश में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में चुनाव से कुछ महीने पहले इस घोटाले का सामने आना निश्चित तौर पर शिवराज सरकार के लिए एक बड़ी मुश्किल है।

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इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी साल मार्च महीने में मध्य प्रदेश जल निगम की ओर से तीन कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने थे, जिसके लिए बोली भी लगाई गई थी। हालांकि जल निगम को पहले ही आगाह किया गया था कि ऑनलाइन दस्तावेजों में छेड़छाड़ की जा रही है। आरोप है कि इसके बारे में शीर्ष अधिकारियों को जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसको नहीं रोका, क्योंकि इसमें उनकी रजामंदी भी शामिल थी।

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रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन उस ऑनलाइन पोर्टल को चलाता है, जिससे छेड़छाड़ की गई है। इसके बाद विभाग के मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष रस्तोगी ने इसकी जांच कराई, जिसमें पता चला कि तीनों कॉन्ट्रैक्ट की नीलामी प्रक्रिया को बदल दिया था। इन तीनों कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 2,322 करोड़ रुपये थी। जांच में खुलासा हुआ कि टेंडर लेने वाली कंपनियों ने पहले ही अंदर के लोगों की मदद से दूसरी कंपनियों की बोलियों को देख लिया था, जिसके आधार पर उन्होंने टेंडर को अपने नाम कर लिया।

रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि मनीष रस्तोगी की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अचानक उन्हें साइंस एंड आईटी के अतिरिक्त चार्ज से हटा दिया गया और उनकी जगह प्रमोद अग्रवाल को चार्ज दे दिया गया। मनीष रस्तोगी को इस तरह से अचानक हटाना और उनकी जगह दूसरे अधिकारी को चार्ज सौंपना गंभीर सवाल खड़े करता है।

सूत्रों की मानें तो आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पुलिस भी जांच में नरमी बरत रही है। वहीं, कांग्रेस ने पीएम मोदी को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है, जिसमें ई-टेंडर घोटाले की जांच सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में करने की मांग की गई है।

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