Saturday , September 22 2018
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आज हो सकती है भारत-अमेरिका के बीच टू प्लस टू वार्ता

भारत-अमेरिका के रक्षा- विदेश मंत्रियों की टू प्लस टू वार्ता के लिए अमेरिकी रक्षा मंत्री जैम्स मैटिस और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो देर शाम दिल्ली पहुंचे। टू प्लस टू वार्ता से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ बैठक होगी। टू प्लस टू वार्ता के बाद संयुक्त बयान जारी होगा और दोनों अमेरिकी मंत्रियों की पीएम नरेंद्र मोदी के साथ अहम बैठक होगी।

सूत्रों ने बताया कि इस टू प्लस टू वार्ता में भारत रूस के साथ 40000 करोड़ के हवाई रक्षा मिसाइल तंत्र एस-400 सौदे पर अमेरिका को आगे बढने की जानकारी देगा। अमेरिका की कोशिश भारत को इस सौदे से दूर रहने केलिए मनाने की है। हालांकि संकेत साफ है कि भारत इस मामले में कदम पीछे नहीं खींचने का साफ संदेश देगा।

इस दौरान दोनों देश चीन को रोकने लिए संयुक्त रणनीति पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि भारत अमेरिका के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए ड्रोन खरीददारी और सेटेलाइट डाटा के आदान प्रदान पर अपनी सहमति देगा। इसकेअलावा मुख्य रूप से आतंकवाद, अफगानिस्तान और ईरान पर विस्तार से चर्चा होगी।

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विदेश मंत्रालय के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो और सुषमा स्वराज की बैठक बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे होगी। इसके बाद पूर्वाह्न 11 बजे टू प्लस टू वार्ता होगी। वार्ता के बाद 2.20 बजे दोपहर बयान जारी होगा। फिर दोनों मंत्रियों की पीएम मोदी के साथ दोपहर 4.30 बजे अहम बैठक होगी। गौरतलब है कि बीते साल पीएम मोदी के अमेरिका दौरे में टू प्लस टू वार्ता पर सहमति बनी थी। हालांकि इसके बाद तारीख घोषित होने के बाद भी वार्ता को दो बार टाला जा चुका है।

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2+2 वार्ता की पूर्व संध्या पर व्यापार समझौतों को लेकर भारत-अमेरिका में ठनी

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ‘2+2 वार्ता’ शुरू होने से एक दिन पहले बुधवार को उनके व्यापारिक नीति निर्माण से जुड़े अधिकारियों के बीच बुधवार को सीमा पार व्यापार को लेकर ठन गई। भारत के वाणिज्य सचिव ने संरक्षणवाद को कम रखने की पैरवी करते हुए व्यापार घाटे से इतर मौजूदा आर्थिक ताकत के हिसाब से सीमा शुल्क तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अमेरिका के वाणिज्य सचिव (अंतरराष्ट्रीय व्यापार) गिल्बर्ट कैप्लान ने भी कहा, व्यापार घाटा समस्याओं का एक अहम संकेत है, लेकिन एक बाद स्पष्ट है कि स्टील और एल्युमीनियम पर सीमा शुल्क बढ़ाने की कार्रवाई अन्य देशों की तरफ से परस्पर लेन-देन की कमी के कारण हुई है। ये देश अमेरिका को निर्यात करना चाहते हैं, लेकिन व्यापार अंतर नहीं घटाना चाहते।

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