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पाकिस्तान समेत आठ देशों पर 20% से ज्यादा कर्ज

अमेरिका ने चीन के ऊपर अपने एक रिपोर्ट में चिंता की बात जाहिर की है।अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर ग्लोबल डेवेलपमेंट ने चीन के कूटनीतिक कदमों की समीक्षा करते हुए  बताया है कि चीन एशिया में अपने प्रभुत्व को बनाये रखने और देशों पर नियंत्रण की मंशा को पूरा करने के लिए लगातार कर्ज दे रहा है ताकि ये देश चीन के विरूद्ध कभी आवाज ना उठा सकें। चीन की महत्वाकांक्षी ऑल्ट147 ‘वन बेल्ट वन रोड’ परियोजना को पांच साल पूरे हो गए हैं। इसके साथ ही चीन ने परियोजना से जुड़े बहुत से देशों कर्ज देकर फंसा लिया है।

यही कारण है कि कर्ज में फंसे देशों ने आवाज उठाना शुरू कर दिया है। थिंक टैंक के मुताबिक- पाककिस्तान, जिबूती, मालदीव, मंगोलिया, लाओस, माेंटेनीग्रो, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान ऐसे मुल्क हैं, जो पारदर्शिता के अभाव और गोपनीय शर्तों के चलते कर्ज चुकाने में कामयाब नहीं होंगे और चीन के डेब्ट ट्रैप का शिकार हो जाएंगे।

जिन 78 देशों को चीन ने इस योजना में शामिल किया है, उनमें से कई की अर्थव्यवस्था निवेश के लायक नहीं हैं। जैसे बीआरआई में शामिल पाकिस्तान, जिसे ओईसीडी रैंकिंग ऑफ कंट्री रिस्क में सातवां दर्जा मिला है। ऐसे देशों के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। साथ ही प्रोजेक्ट का भविष्य भी संशय में रहेगा। इन्हीं सवालों के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीते हफ्ते प्रोजेक्ट का बचाव किया था। उन्होेंने कहा- ये कोई ‘ऑल्ट147 क्लब’ नहीं है। उन्होंने ये भी दावा कि परियोजना में शामिल देशों के साथ चीन का व्यापार 35 हजार करोड़ रुपए बढ़ा है। इसमें डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट 4.2 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया है।

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चीन की परियोजनायें और कर्ज
1. बेल्ट एंड रोड चीन का सिल्क रोड है और इस प्रोजेक्ट के देशों में आर्थिक संकट है। खुद चीन की 10 बड़ी कंपनियों पर 9 गुना कर्ज है और गैर चीनी देशों पर 2.4 गुना कर्ज है । प्रोजेक्ट की लागत और चीन  से मिलने वाले कर्ज की रकम पूरी तरह से गैर पारदर्शी है। अनुबंध को हासिल करने में स्पष्ट प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। प्रोजेक्ट का खाका भी बेमेल है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडी के मुताबिक- चीन की इस योजना में 78 देश जुड़े हैं। इसमें से एक भी देश की अर्थव्यवस्था निवेश के लायक नहीं है। कई देश की अर्थव्यव्यस्था संकटग्रस्त है।
2. तीन देशों ने कर्ज नहीं चुकाया तो चीन ने उनकी महत्वपूर्ण जगहें लीं जैसे पाक के सामरिक महत्व वाले ग्वादर पोर्ट चीन के कब्जे में, कॉलोनी बनाएगा । पाक के नए पीएम इमरान ने प्रोजेक्ट में पारदर्शिता की मांग की है। पाक को चीन ने 1.33 लाख करोड़ रु. कर्ज दे रखा है। ये उसके कुल कर्ज का 5वां हिस्सा है। कर्ज न चुका पाने से चीन ने सामरिक महत्व के गवादर पोर्ट पर पकड़ बना ली है। वहां अब वह कॉलोनी बसाने की तैयारी कर रहा है।

3. लाओस पर 1.4 लाख करोड़ कर्ज है जो लगातार चढ़ रहा है।लाओस को चीन ने 1.4 लाख करोड़ रुपए कर्ज दिया है। ये लाओस की जीडीपी का 40% है। ओबीओआर प्रोजेक्ट से कंबोडिया का      कारोबारी  घाटा 10% तक बढ़ गया है जिसकी वजह से वहां विपक्ष विरोध कर रहा है।

4. चीन का जिबूती पर उसकी जीडीपी का 85% कर्ज है । 2014 में जिबूती पर चीनी कर्ज उसकी जीडीपी के 50% था, जो अब बढ़कर 85% हो चुका है। मोंटेनीग्रो ने मोटरवे के लिए चीन से 5.7 हजार  करोड़ का कर्ज लिया था। ये उसकी जीडीपी का 20% है।

श्रीलंका
5. 2013 में जिनपिंग ने ‘न्यू सिल्क रोड’ के नाम से मशहूर इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। तब उन्होंने इसे ‘प्रोजेक्ट ऑफ द सेंचुरी’ कहा था। इसके तहत दुनियाभर में रेलवे, रोड और बंदरगाहों का एक नेटवर्क तैयार हो रहा है। परियोजना के तहत 1814 परियोजनाओं में से 270 पर ही बेहतर काम हो पाए हैं। यह पूरी परियोजना का 32 प्रतिशत हिस्सा है।

6. मालदीव के कर्ज में 80% हिस्सा चीन का, बंदरगाह 99 साल के लिए दिया । मालदीव पर कुल कर्ज का 80% हिस्सा चीन का है। ओबीआेआर के लिए उसने चीन से 12 करार कर रखे हैं। पिछले साल चीन के करीब 10 हजार करोड़ रुपए नहीं चुका पाने पर मालदीव को एक रणनीतिक बंदरगाह को 99 साल की लीज पर चीन को देना पड़ा था।

7. श्रीलंका पर 38 हजार करोड़ का कर्ज है । हंबनटोटा बंदरगाह चीन के कब्जे में है जिससे श्रीलंका पर चीन का 38 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। श्रीलंका इस कर्ज को चुका नहीं पाया था। इस कारण  उसने आर्थिक कठिनाइयों की वजह से अपना हम्बनटोटा बंदरगाह चीन को सौंप दिया है। इसकी लागत 10 हजार करोड़ रुपए है।

8. मलेशिया ने 1.4 लाख करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट रोका । मलेशिया में महातिर मोहम्मद सरकार ने अगस्त में चीन की मदद से चलने वाले तीन प्रोजेक्ट्स को बंद करने का ऐलान किया है। इसमें 1.4 लाख करोड़ रुपए का रेलवे प्रोजेक्ट भी शामिल है।

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