Wednesday , September 26 2018
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राफेल के बाद अब कांग्रेस ने सरकार पर कोयला से किया हमला

राफेल सौदे के बाद कोयला घोटाले के रुप में एक नया मामला सामने आया है जिसमें विदेशी कानून से हाथ बंधे होने का हवाला देकर जांच प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि 29 हजार करोड़ रुपये के कोयला घोटाले की जांच प्रक्रिया बार-बार प्रभावित की जा रही है क्योंकि इस घोटाले के बड़े किरदार के रुप में पीएम मोदी के खास दोस्त गौतम अडानी का नाम शामिल है। पार्टी ने इस मामले में पीएम नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली से स्पष्टीकरण देने की मांग की है। 

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक प्रेस कांफ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि साल 2005 से लेकर साल 2010-11 के बीच इंडोनेशिया से कोयले की खरीद की गई थी। इस खरीद प्रक्रिया को सिंगापुर की एक कंपनी के माध्यम से भारत की कुछ कंपनियों ने किया था जिसमें गौतम अडानी की कंपनी सबसे बड़ी हिस्सेदार थी। बाद में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने इस खरीद प्रक्रिया में घोटाले की आशंका जताई थी। डीआरआई ने इस घोटाले की जांच के लिए अक्टूबर 2014 में खरीद प्रक्रिया में शामिल चालीस कंपनियों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज किया था। 

जयराम रमेश के मुताबिक जब डीआरआई ने इस मामले की जांच शुरु की तो गौतम अडानी की कंपनी ने सिंगापुर की अदालत में एक याचिका दायर कर अपील की कि इस मामले से जुड़े कागजात भारत की जांच एजेंसी को न दिए जाएं। लेकिन हाल ही में सिंगापुर की अदालत ने अडानी की इस अर्जी को खारिज कर दिया है। इसके बाद अब अडानी ने 28 अगस्त को बांबे हाईकोर्ट में अपील दायर कर इस मामले की जानकारी देने पर रोक लगाने की मांग की है। कांग्रेस नेता के मुताबिक यह बेहद संगीन मामला है कि जांच प्रक्रिया को बार-बार बाधित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने  कहा कि भारत में जितना भी कोयला इंडोनेशिया से आयात किया जाता है, उसका 70 फीसदी हिस्सा अडानी की कंपनी के माध्यम से ही किया जाता है। और अगर इस खरीद में कोई घोटाला हुआ है तो अडानी के ऊपर कोई मामला क्यों नहीं दर्ज किया गया।
         
जयराम रमेश ने कहा कि इस मामले में सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि वित्त सचिव हंसमुख अधिया ने जब इस मामले की जांच के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की तत्कालीन चेयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य से पत्र लिखकर कुछ जानकारी मांगी थी, तब पत्र के जवाब में अरुंधती भट्टाचार्य ने लिखा कि इसका जवाब इसलिए नहीं दिया जा सकता क्योंकि इस लेनदेन से जुड़ी जानकारी देना सिंगापुर के कानून का उल्लंघन होगा। 

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जांच के लिए हुई थी एसआईटी की मांग

सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने सितंबर 2017 में दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर इस मामले की जांच करने के लिए एसआइटी गठित करने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस मामले में जांच सही ढंग से नहीं की जा रही है और मामला दर्ज करने के लगभग तीन साल बीत जाने के बाद भी इसमें कोई प्रगति नहीं हो रही है।

डीआरआई ने 9 मार्च 2018 को हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए किसी एसआइटी के गठन की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि वह इस मामले की जांच ठीक ढंग से कर रही है। डीआरआई ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में शामिल 40 कंपनियों में से चार के खिलाफ कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया गया है। 

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