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दिल्ली में पहली बार 70 के पार हुआ डीजल

डॉलर के मुकाबले रुपये के लगातार कमजोर होने के कारण पेट्रोल डीजल के दामों में आग लगी हुई है। शनिवार को दिल्ली में पहली बार डीजल का दाम 70 रुपये के पार चला गया। वहीं आज से घरेलू एलपीजी सिलेंडर भी महंगा हो गया है। अब इसको खरीदने के लिए भी लोगों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे। इसके बाद इस महीने लोगों को सीएनजी पीएनजी के बढ़ते दामों का भी सामना करना पड़ेगा।

आज ईंधन की कीमतें 29 मई के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। दिल्ली में अब एक लीटर डीजल का दाम 70.21 रुपये प्रति लीटर होगा। यहां उल्लेखनीय है कि दिल्ली में देश के चारों महानगरों में ईंधन के दाम सबसे कम होते हैं. पेट्रोल का दाम भी बढ़कर 78.51 रुपये लीटर पर पहुंच गया।

इसलिए बढ़े रसोई गैस के दाम
सब्सिडीयुक्त रसोई गैस सिलेंडर का दाम शुक्रवार मध्यरात्रि से दिल्ली में 1.49 रुपये बढ़कर 499.51 रुपये प्रति सिलेंडर हो जायेगा। यह वृद्धि मूख्य तौर पर आधारभूत मूल्य पर कर बढ़ने की वजह से हुई है. देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम विपणन कंपनी इंडियन आयल कारपोरेशन ने एक वक्तव्य में यह जानकारी दी है। सरकार रसोई गैस की सब्सिडी राशि सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचाती है। हालांकि, उपभोक्ता को सिलेंडर बाजार मूल्य पर खरीदना होता है।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम की घट बढ़ केसाथ सब्सिडी राशि में भी बदलाव होता है. नियमों के मुताबिक एलपीजी पर जीएसटी का भुगतान सिलेंडर के बाजार मूल्य पर करना होगा। मूल्य की घट-बढ़ पर सब्सिडी का भुगतान सरकार करेगी लेकिन कर का भुगतान उपभोक्ता को ही करना होता है। यही वजह है कि कर भुगतान बढ़ने से सब्सिडी युक्त सिलेंडर करीब डेढ रुपया महंगा होगा।

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14 फीसदी बढ़ेंगे सीएनजी के दाम
सरकार अक्तूबर से घरेलू प्राकृतिक गैस की कीमत में 14 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी कर सकती है। इससे सीएनजी और पीएनजी की कीमत तो बढ़ेगी ही, इसके कारण बिजली और यूरिया उत्पादन की लागत भी बढ़ जाएगी।

घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक प्राकृतिक गैस के अधिकतर घरेलू उत्पादकों को भुगतान की जाने वाली कीमत एक अक्तूबर से बढ़ाकर प्रति यूनिट (एमएमबीटीयू) 3.5 डॉलर की जा सकती है, जो अभी 3.06 डॉलर प्रति यूनिट है। एक यूनिट 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट की होती है।

देश में प्राकृतिक गैस की कीमत हर छह महीने पर फिर से तय की जाती है। यह कीमत अमेरिका, रूस और कनाडा जैसे गैस सरप्लस देशों की औसत दरों के आधार पर तय की जाती है। सूत्रों ने कहा कि प्राकृतिक गैस कीमतों में संशोधन की घोषणा 28 सितंबर को हो सकती है। भारत अपनी आधी गैस जरूरतों के लिए आयात करता है और आयातित गैस की कीमत घरेलू गैस के मुकाबले दोगुने से भी अधिक पड़ती है।

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