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दून एक्सप्रेस-वे की रफ्तार पर लगा ‘ब्रेक’

दून एक्सप्रेस-वे की रफ्तार पर ‘ब्रेक’ लग गया है। जौलीग्रांट से सहस्त्रधारा तक एक्सप्रेस वे का निर्माण दो साल से अधर में लटका था। एमडीडीए द्वारा 360 करोड़ से अधिक की परियोजना का काम दो चरणों में पूरा किया जाना था, लेकिन शासन की ओर से धनराशि जारी नहीं होने के चलते यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।

राजधानी की ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था में सुधार के लिए एमडीडीए ने वर्ष 2016 में एक्सप्रेस-वे निर्माण की योजना बनाई थी। जिसके जरिये जौलीग्रांट एयरपोर्ट से शहर की कनेक्टिविटी सुधारी जानी थी। एक्सप्रेस वे को शहर के बाहरी हिस्से से निकाला जाना था। इससे जुड़ी आंतरिक सड़कों के जरिये ट्रांसपोर्टेशन में लगने वाले समय को भी कम किया जाना था। एक्सप्रेस-वे का कार्य दो चरणों में पूरा किया जाना था।

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पहले चरण में सहस्त्रधारा से रायपुर पुल तक निर्माण होना था जबकि दूसरे चरण में रायपुर पुल से जौलीग्रांट तक एक्सप्रेस वे बनाया जाना था। सर्वे के साथ ही इसकी फिजिबिलिटी स्टडी और फाइनेंसियल मॉडल भी तैयार किया गया, लेकिन तत्कालीन एमडीडीए उपाध्यक्ष के जाते ही इस पर ब्रेक लग गया। एमडीडीए के अधिकारियों के मुताबिक एक्सप्रेस-वे में कई स्थानों पर छोटे-बड़े पुल भी बनने थे। जौलीग्रांट से थानो होते हुए रायपुर और रायपुर से सहस्त्रधारा के बीच पहाड़ी क्षेत्र में मोड़ कम से कम करने की भी योजना थी, जिससे लोगों का समय बच सके।

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अधिकतम क्षेत्रों को जोड़ने की थी योजना 
एक्सप्रेस-वे को भले ही सहस्त्रधारा से रायपुर होते हुए जौलीग्रांट निकाला जाना था, लेकिन इससे ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों को जोड़े जाने की योजना थी। अधिकतम क्षेत्रों को इसके पास रखा जाना था, जिससे कनेक्टिविटी में सुधार हो सके।

दो साल पहले एक्सप्रेस वे पर कार्य शुरू किया गया था, लेकिन अकेले एमडीडीए इस योजना को पूरा नहीं कर सकता था। अन्य विभागों की भी मदद चाहिए थी। ऐसा नहीं हो पाने के चलते इस योजना का कार्य अटक गया।

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