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कायर आतंकियों के दमन का वक्त

प्रेम शर्मा
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने पिछले तीन दिन में एक अजीब खेल खेला है। पुलिसकर्मियों के 11 रिश्तेदारों को किडनैप कर लिया। जब आतंकी गिरफ्तार पिता को छोड गया तो इ एक धमकी भरा ऑडियो जारी किया जिसमें उसने कहा कि हिज्बुल के कमांडर रियाज नाइकू की धमकी- जैसा करोगे, वैसा भरोगे, और बाद सभी लोगों को रिहा कर दिया। दरअसल, पुलिस ने घाटी के पुलवामा जिले में आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर रियाज नाइकू के पिता को अरेस्ट किया था। इसके बाद नाइकू ने पुलिसकर्मियों के रिश्तेदारों को किडनैप करना शुरू कर दिया। इसके बाद ’जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने अपने ट्वीट में आतंकियों और सुरक्षाबलों को एक ही कतार में रखने की कोशिश की है। उन्होंने लिखा – आतंकी और सुरक्षाबल एक दूसरे के परिवार को प्रताड़ित कर रहे हैं। यह निंदनीय है और हमारी स्थिति के स्तर के और नीचे गिरने का प्रतीक है। इसका एक प्रभाव यह भी पड़ा सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले आर्टिकल 35ए पर सुनवाई अगले साल जनवरी तक स्थगित कर दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी 2019 में होगी। वहीं, इस मुद्दे पर शुक्रवार को घाटी में अलगाववादियों ने बंद बुलाया। जिसकी वजह से बाजार, स्कूल और कॉलेज बंद रहे। अब प्रश्न यह उठता है कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद चंद दिनों तक बिलों में धुसकर बैठे आतंकी अब कायरना हरकत पर उतर आए है। ऐसे समय में विपक्षी राजनैतिक दलों की टीका टिप्पणी और भारत सरकार की शांति सोच देश और जनता के साथ सेना के लिए भी दुर्भाग्य जनका है। यह वक्त इस बाॅत पर जोर दे रहा है कि आतंकियों को शरण देने में बेनकाब हो चुका पाकिस्तान और कश्मीरी सरकार को दरकिनार कर आतंकियों का दमन शुरू करने फिर लगातार सार्जिकल स्ट्राइक की जरूरत है। घाटी के मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों की एक नई सूची जारी हुई है। इसमें हिज्बुल के आतंकी रियाज नाइकू का नाम सबसे ऊपर है। नाइकू घाटी में साल 2010 से सक्रिय है। नाइकू के अलावा हिज्बुल के ए़़ कैटिगरी के आतंकी सैफुल्लाह और जीनत उल इस्लाम का नाम भी है। मालूम हो कि कुछ दिन पहले कुख्यात आतंकवादी सैयद सलाहुद्दीन का दूसरा बेटा गिरफ्त में आया है।आतंकियो ने कायरना हरकित के तहत पुलिसवालों के परिवारवालों को किडनैप करने का नया ट्रेंड अपनाया है। पहले आतंकी ऐसा नहीं करते थे। ऑपरेशन ऑल आउट के तहत सैकड़ों आतंकियों के मारे जाने से आतंकी बैखला गए हैं। इसलिए वे अपहरण की नई रणनीति अपना रहे हैं। डिफेंस एक्सपर्ट कर्नल (रिटायर्ड) अशोक कहते हैं, पहले पाकिस्तान से हमला करने वाले आतंकी ज्यादा थे। अब घाटी के लड़कों को ही रिक्रूट किया जा रहा है। इसी बीच पुलिस का इंटेलिजेंस काफी मजबूत हुआ है। एनकाउंटर बढ़े हैं। ऐसे में आतंकियों के सामने खुद को बचाने की चुनौती है। घाटी में सक्रिय आतंकवादियों का असली चरित्र अब सामने आ रहा है। कभी वे कश्मीरियत की बात करते थे। अब उनका नकाब उतर रहा है, जब वे कश्मीरियों को ही निशाना बना रहे हैं। यह हताशा का नतीजा है। उस हताशा का नतीजा, जहां वे चारो ओर से घिर चुके हैं और सुरक्षाबलों की कार्रवाई से बौखलाए हुए हैं। नतीजा यह कि अब उन्होंने पुलिसकर्मियों के परिवारों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। पुलिस वाले तो पहले से निशाने पर थे। घाटी के अलग-अलग स्थानों से आतंकवादियों ने कई लोगों को अगवा किया है, जिनमें ज्यादातर वरिष्ठ पुलिसकर्मियों के रिश्तेदार हैं। एक अपहरण पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती गृहनगर से भी हुआ है, जिसने राजनीति को गर्मा दिया है। हालांकि सेना ने अपहृतों की तलाश में जिस तरह का सघन सर्च अभियान छेड़ा है, जल्द ही किसी बड़ी कार्रवाई से इंकार नहीं किया जा सकता।.घाटी का आतंकवाद अब उस दौर में है जहां जल्द ही किसी निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है। कश्मीर में अब तक अपनी-अपनी सुविधा की राजनीति ही हुई है। हालिया घटनाएं सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं हो गईं कि इनमें सुरक्षा बलों और पुलिस के परिवार निशाने पर आए हैं, बल्कि इसलिए भी कि यह सब पंचायत चुनाव पर सुरक्षाबलों की तैयारियों के बीच हुआ है। आतंकी संगठन कश्मीर में पंचायत चुनाव से पहले दहशत का कोई ऐसा मंजर दिखाना चाहते हैं, जिसकी गूंज दूर तक सुनाई दे। पुलिसवालों के रिश्तेदारों का अपहरण कर उन्होंने यही करने की कोशिश की है। लेकिन उन्हें शायद भारतीय सुरक्षा बलों की उस जीवट का अंदाजा नहीं है, जो धैर्य खत्म होने के बाद आकार लेती है। यह उस हताशा का नतीजा भी है जो आपरेशन ऑल आउट में आतंकी लीडरशिप के सफाए से आया है। सेना में पिछले दिनों हुई भर्ती के दौरान कश्मीरी युवाओं की भीड़ उमड़ने से भी वे घबराए हुए हैं। यही कारण था कि वे ईद में भी आतंक फैलाने से नहीं चूके, अब नई इबारत लिख रहे हैं। आतंक की यह नई इबारत महबूबा मुफ्ती को भी नजर आनी चाहिए। इस पूरे प्रकरण में महबूबा मुफ्ती ने विवादास्पद बयान देकर माहौल को गरमा दिया है। उन्होंने आतंकवादियों और सुरक्षाबलों को एक ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। महबूबा ने कहा कि ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आतंकवादी और सुरक्षाबल दोनों अब बदले की कार्रवाई में एक दूसरे के परिवारों को निशाना बनाने लगे हैं।श् महबूबा का यह कहना कि किसी भी मामले में परिवारों को निशान नहीं बनाया जाना चाहिए, सही हो सकता है लेकिन ऐसे वक्त में जब आतंकवादी आतंक की नई परिभाषा गढ़ते हुए पुलिसवालों के परिजनों को निशाना बनाने लगें, यह अनर्गल प्रलाप है। राजनीति की भाषा में इसे दोनों पलड़े साधे रखने की जुगत कहा जाता है, लेकिन एक पलड़े पर जब आतंकी हों तो यह युक्ति उन्हीं के पक्ष में ज्यादा झुकती है। कहीं न कहीं यह उनके प्रति सदाशयता का प्रदर्शन भी है जो महबूबा की बातों में पहले भी गाहे-बगाहे दिखता रहा है। आपकी राजनीति जो कहे, आतंकियों और पुलिसवालों को एक ही खांचे से परखना न तो बुद्धिमत्ता कहा जा सकता है, न ही सुलझी हुई राजनीति का नमूना। सच तो यह है कि ऐसा बयान किसी भी खांचे में फिट नहीं बैठता। इसे सिर्फ गैर-जिम्मेदार कहकर भी नहीं टाला जा सकता।आतंकवाद को लेकर कई राष्ट्र सक्रिय हो चुके है। उन राष्ट्रों ने साॅझाा मंच में भी पाकिस्तान को कश्मीर सुलग रही आतंकवाद की आग को जलाए रखने के लिए जिम्मेदार माना है ऐसे में यह बाॅत तो तय हो जाती है कि भारत का पक्ष मजबूत है, ऐसे में आतंकवाद की वकालत करने वालों को यह जरूर सोच लेना चाहिए कि वे कश्मीर की जनता के साथ सीधे सीधे धोका कर रहे है।

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