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दो महिला जज एक साथ बैठकर सुनेंगी यह मुकदमा

अगले सप्ताह शिक्षक दिवस वाले दिन जब जस्टिस आर. भानुमति के साथ इंदिरा बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में एक साथ बैठकर मुकदमा सुनेंगी तो ये 5 साल पुराने एक इतिहास की पुनरावृत्ति सरीखा होगा। बता दें कि शीर्ष न्यायालय में इससे पहले महज 2013 में ही ‘ऑल वुमन बेंच’ रही है, जब जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और रंजना प्रकाश देसाई ने एक साथ बैठकर मुकदमों की सुनवाई की थी।

हालांकि शीर्ष अदालत में जस्टिस इंदिरा बनर्जी की अगस्त में शपथ ग्रहण के साथ भी एक इतिहास बन चुका है। पहली बार सुप्रीम कोर्ट में एक साथ तीन महिला जजों को नियुक्ति दी गई हे। इंदिरा बनर्जी आजादी के बाद से शीर्ष न्यायालय में नियुक्त होने वाली महज 8वीं जज हैं।

फिलहाल तैनात तीनों जजों में जस्टिस भानुमति सबसे वरिष्ठ हैं, जिन्हें 13 अगस्ता, 2014 में शीर्ष अदालत में नियुक्त किया गया था। अब शीर्ष अदालत में 19 जुलाई, 2020 को जस्टिस भानुमति की सेवानिवृत्ति तक तीन महिला जजों की मौजूदगी बनी रहेगी।

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जस्टिस फातिमा बीवी थीं पहली महिला जज

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सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में जज के तौर पर नियुक्त होने वाली पहली महिला जस्टिस फातिमा बीवी थीं। उनके बाद जस्टिस सुजाता मनोहर, रूमा पाल, ज्ञान सुधा मिश्रा, रंजना प्रकाश देसाई, आर. भानुमति, इंदु मल्होत्रा और अब इंदिरा बनर्जी को नियुक्ति मिली है। जस्टिस फातिमा, मनोहर और रूमा पाल सुप्रीम कोर्ट में अपनी तैनाती के दौरान पैनल में अकेली महिला जज के तौर पर मौजूद रहीं थीं।

39 साल लगे महिला जज की तैनाती में

 1950 में गठित सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस फातिमा बीवी की तैनाती 1989 में की गई थी।
 शीर्ष अदालत में 6 साल का सबसे लंबा कार्यकाल जस्टिस रूमा पाल का रहा।
 28 जनवरी 2000 से 2 जून, 2006 तक सुप्रीम कोर्ट में जज रही थीं जस्टिस रूमा।
 2011 में पहली बार शीर्ष अदालत के पैनल में एक साथ दो महिला जजों को नियुक्ति मिली थी।
– 2013 में इकलौती बार दो महिला जजों की पीठ मामलों की सुनवाई के लिए गठित की गई थी।

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