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विकसित देशों की तर्ज पर जल्द शुरू होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र

अमेरिका और इंग्लैंड जैसे विकसित देशों की तर्ज पर केंद्र सरकार जल्द सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शुरू करने की तैयारी में है। इस केंद्र के प्रयोगों के जरिए साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में एआई तकनीक का लाभ मुहैया कराया जाएगा। जिसका नेतृत्व राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) के हाथों में रहेगा।

इलेक्ट्रॉनिक सूचना एवं प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने एआई का नीतिगत ढांचा तैयार करने के लिए चार समितियों का गठन किया था। पहली समिति आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर पीपी चक्रवर्ती के नेतृत्व में एआई के प्लेटफार्म और डाटा से संबंधित है। दूसरी समिति आईआईटी बीएचयू प्रोफेसर राजीव संगल की अध्यक्षता में प्रमुख क्षेत्रों में एआई के लिए राष्ट्रीय मिशन की पहचान करने पर काम कर रही है।

तीसरी समिति नैसकॉम अध्यक्ष आर चंद्रशेखर की देखरेख में तकनीकी क्षमताओं की मैपिंग, सभी क्षेत्रों में नीतिगत जरूरतों पर काम कर रही है। चौथी समिति आईआईटी भिलाई के निदेशक रजत मूना के नेतृत्व में साइबर सुरक्षा, कानूनी और नैतिक मुद्दों में एआई के प्रयोग पर काम कर रही है। इन सभी समितियों की सिफारिशों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एआई व्यवहारिक तौर पर लागू करने पर कदम बढ़ाएगा।

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एनआईसी प्रबंध निदेशक नीता वर्मा ने बताया कि बहुत ही जल्द संस्थान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एआई शुरू करने वाला है। उसमें हम यह देखेंगे सरकार के कौन से मामलों में एआई का प्रयोग किया जा सकता है। दूसरा एआई सेवाएं मुहैया कारने की पेशकश करेंगे, क्योंकि एआई में डेटा को प्रोसेस करने के लिए बहुत बड़ा ढांचा चाहिए होता है।

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हरेक विभाग इतना बड़ी व्यवस्था नहीं कर सकता है। क्लाउड में यह संभव है, लेकिन सरकार का डेटा उसमें नहीं रखा जा सकता है। इसलिए हम अपने ही डेटा सेंटर में यह सेवाएं देंगे। उन्होंने कहा कि मौजूदा जरूरतों के मद्देनजर हमने एनआईसी भवन में एक एआई तकनीकी डिविजन बनाया हैं जो इस तकनीक के आसपास के मामलों के प्रयोग की योग्यता पर काम करता है।

वर्मा ने कहा कि एआई बहुत ही आशाजनक तकनीक है। हम लोग बहुत समय से जानते हैं, लेकिन आज उसके प्रयोग वहां तक पहुंच गए हैं कि हम उसे प्रयोग में ला सकते हैं। इस तकनीक को चलाने के लिए डेटा चाहिए होता है, ताकि मशीन पढ़कर आगे बढ़ सके। वर्मा ने कहा कि वर्तमान में हमारे पास बहुत सारे प्रोग्राम हैं जैसे कोर्ट का ही आप देख लीजिए कि इतने सालों का डेटा है। हाल ही में तीन चार महत्पूर्ण खंड उठाए हैं जिसमें अदालत से जुड़ा मामला है कि किस तरह से मुकदमों को आप किफायती रूप से निर्धारण करके रोजाना की सूची तैयार करें।

गौरतलब है कि नीति आयोग भी एआई को स्वास्थ्य, कृषि एवं शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग में लाने पर काम कर रहा है। हालांकि वह सिर्फ इसकी रूपरेखा तैयार करेगा जबकि तकनीकी रूप से लागू करने की जिम्मेदारी आईटी मंत्रालय की होगी।

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