Wednesday , September 19 2018
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देखिए हाकिम? सड़कों पर खड़ी बसें देती हादसे को दावत

शहर में 35 से ज्यादा ब्लैक स्पॉट हैं। लेकिन सड़कों पर खडे़ वाहन भी किसी ब्लैक स्पॉट से कम नहीं हैं। दिल्ली रोड पर सड़कों के किनारे खड़ी होने वाली ऐसी बसें हादसों को रोजाना दावत देती हैं। कई बार तो सड़क पर खड़े वाहनों में पीछे से कार या बाइक घुस जाती है, जिसमें लोगों की जान चली जाती है। सिर्फ मेरठ जिले की बात करे तो एक साल में 50 से अधिक लोगों की जान ऐसे हादसे में जा चुकी है।

रोडवेज की अनुबंधित बसें रात आठ से नौ बजे के बाद बंद हो जाती है। ये बसें दिल्ली रोड पर दोनों तरफ सड़क पर खड़ी हो जाती हैं। जिसके चलते सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है। रात को सड़क पर भीड़भाड़ नहीं होती, जिसके चलते लोग वहां से वाहनों को दौड़ाते है। हालत ये है कि दिल्ली रोड पर खड़ी इन बसों से रोजाना दूसरे वाहन टकराते हैं। जिसमें कई हादसों में लोगों की जान जा चुकी है। यह रोजाना की समस्या है, बावजूद पुलिस प्रशासन की नींद नहीं टूटती।

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बुधवार को मौत बनकर दौड़े कंटेनर ने पांच लोगों की जान ले ली। उसके बाद फुटबाल चौक में कंटेनर घुस गया। इस दौरान भी सड़कों के किनारे बसें खड़ी थी। लोगों की मानें तो सड़कों पर बसें न होती तो शायद बेकाबू कंटेनर को वहां से निकलने का रास्ता मिल जाता व लोगों की जान बच जाती। इसको लेकर भी लोगों ने पुलिस प्रशासन के प्रति आक्रोश जताया। लोगों ने बताया कि दिल्ली रोड पर सड़क के दोनों किनारे पर बसें खड़ी नहीं होनी चाहिए। यह हादसों की एक बड़ी वजह है।

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सर्दी में सबसे ज्यादा हादसे
सर्दी में सबसे ज्यादा हाईवे व मुख्य मार्गों पर सड़क किनारे वाहनों में पीछे से वाहन घुसते हैं, जिसमें लोगों की जान चली जाती है। इसको लेकर हाईवे और मुख्य मार्गों पर पोस्टर व बैनर भी लगाए जाते हैं कि सड़कों पर खड़े वाहन हादसे करा देते है। कोई ऐसी गलती न करें, जिससे किसी की जान चली जाए। इसके बावजूद भी यह व्यवस्था नहीं बन पाती। लोग सड़कों पर वाहन खड़ा करना बंद नहीं करते।

फुटबाल चौक से दिल्ली चुंगी तक कब्जा
फुटबाल चौक से दिल्ली चुंगी तक रोडवेज की अनुबंधित बसों का रात में कब्जा होता है। दोनों तरफ लाइनें लगाकर बसें खड़ी होती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की साठगांठ से बसें खड़ी होती हैं। पुलिस को इसकी जानकारी है, इसके बावजूद एक्शन को तैयार नहीं है।

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