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विधायकों की जानकारी न देने पर मोदी सरकार को ‘सुप्रीम’ फटकार

दागी सांसद व विधायकों पर लंबित आपराधिक मुकदमे और उनके निपटारे के बारे में मांगी गई जानकारी न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार की तैयारी ठीक नहीं है।

न्यायमूर्ति रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पाया कि केंद्र सरकार की तैयारी ठीक नहीं है क्योंकि सरकार के वकील के पास गत वर्ष नंवबर में पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं था। लिहाजा पीठ ने सुनवाई पांच सितंबर तक के लिए टालते हुए केंद्र सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।

वास्तव में गत वर्ष एक नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और संबंधित अथॉरिटी को यह बताने के लिए कहा था कि दागी 1581 सांसद व विधायकों के मुकदमों का क्या हुआ। इनमें में कितने मामलों का निपटारा एक वर्ष के भीतर हुआ?

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मालूम हो कि 18 मार्च 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों का निपटारा एक वर्ष के भीतर करने का निर्देश दिया था। साथ ही पीठ ने यह भी पूछा था कि कितने मामलों में सजा हुई और कितने मामले में आरोपी बरी हुए।

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सरकार को यह भी बताने के लिए कहा गया था कि वर्ष 2014 से 2017 केबीच कितने ऐसे नए मामले आएं। साथ ही सांसद व विधायकों केमामलों के निपटारे के लिए विशेष अदालतों का गठन करने के लिए कहा था। गत 21 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने फिर से यह जानना चाहा था कि कितने स्पेशल कोर्ट गठित हुए और इनमें से कितने सत्र न्यायालय और कितने मजिस्ट्रेट कोर्ट।

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि 11 राज्यों में 12 स्पेशल कोर्ट का गठन किया गया। इन स्पेशल कोर्ट में 7.80 करोड़ सालाना खर्च आएगा। वहीं अन्य सवालों केजवाब के लिए कानून मंत्रालय ने कहा है कि वह अलग से हलफनामा दाखिल करेगा।

केंद्र सरकार ने पीठ को बताया कि दिल्ली दो स्पेशल कोर्ट जबकि उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगना, कर्नाटक, केरल, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में एक स्पेशल कोर्ट का गठन किया जाएगा। वहीं तमिलनाडु ने बताया कि फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

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