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अरुंधती राय ने कहा- पीएम नरेंद्र मोदी की छवि सुधारने के लिए हुई थी गिरफ्तारी

भीमा कोरेगांव में हुए हिंसक प्रदर्शन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की कथित साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किये गए पांच लोगों के समर्थन में गुरुवार को दिल्ली में दर्जनों संगठनों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आए अरुंधती राय, अरुणा राय, जिग्नेश मेवाणी और प्रशांत भूषण ने एक स्वर में गिरफ्तारी के खिलाफ सरकार की निंदा की। प्रशांत भूषण ने इसे पीएम मोदी की गिरती लोकप्रियता को बढ़ाने की एक सोची समझी साजिश बताया।

सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार ने जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे भीमा कोरेगांव में हुए प्रदर्शन के दिन वहां पर उपस्थित तक नहीं थे। इन लोगों को गिरफ्तार करने के लिए जानबूझकर दूसरी एफआईआर बनाई गई। इस एफआईआर के बनने के भी पांच महीने बीत चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन लोगों को गिरफ्तार करने के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों किया। भूषण के मुताबिक गिरफ्तार पांचों लोग मानवाधिकार की लड़ाई लड़ने वाले पत्रकार, वकील और शिक्षक थे। सरकार हर उस आदमी का मुंह बंद करने की कोशिश कर रही है जो लोगों के हितों की आवाज उठाते हैं।

मीडिया में प्रयोग हो रहे ‘अर्बन नक्सल’ शब्द पर गहरी आपत्ति जताते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधती राय ने कहा कि यह मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को बदनाम करने की रणनीतिक साजिश है। आज जो सरकार का विरोध कर रहा है और आदिवासियों-दलितों की आवाज उठा रहा है, उसे अर्बन नक्सल कहा जा रहा है। इस शब्द पर अपनी आपत्ति जताते हुए राय ने कहा कि इसके खिलाफ वे #meetoourbannaxal यानी ‘मी टू अर्बन नक्सल’ हैशटैग से अपनी बात रख रही हैं। उन्होंने अन्य लोगों से भी इस हैशटैग पर ज्यादा से ज्यादा अपनी बात रखकर सरकार की मुखालफत करने की अपील की।

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सरकार ने यह सब कुछ जानबूझकर किया: अरुंधती राय

अरुंधती राय ने कहा कि सरकार ने यह सब कुछ जानबूझकर किया क्योंकि उन्हें पता था कि ऐसी गिरफ्तारी के विरोध में जोरदार आवाज उठेगी। और जितनी तेजी से यह आवाज उठेगी, लोगों के मन में सरकार के प्रति सहानुभूति पैदा होगी क्योंकि उनके मन में यह संदेश जाएगा कि सरकार नक्सलियों के खिलाफ कदम उठाना चाहती है, लेकिन उसे यह काम नहीं करने दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में किए गए कुछ सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में तेजी से गिरावट होने की बात सामने आई है। सरकार इस लोकप्रियता को सुधारने के लिए ही इस तरह के हथकंडे अपना रही है।

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गुजरात से दलित नेता और विधायक जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि सरकार दलित संगठनों का उभार सहन नहीं कर पा रही है। वह इसे हर हाल में रोकना चाहती है। अगर रोका न जा सके तो दलित संगठनों के आंदोलन को हिंसा के नाम पर बदनाम करने की साजिश की जा रही है जिससे लोगों के मन में दलितों और उनके आंदोलनों के प्रति सहानुभूति खत्म हो जाए।

उन्होंने कहा कि गुजरात चुनाव के भी ठीक पहले इसी प्रकार की साजिश रची गई थी और कई लोगों को निशाना बनाया गया था। ऐसा सिर्फ मोदी की गिरती लोकप्रियता को उठाने के लिए किया जा रहा है।

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