Saturday , November 17 2018
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लालू के बाद राबड़ी और तेजस्वी को होगी जेल या मिलेगी बेल

बिहार की राजनीति के सबसे बड़े सियासी परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को लालू यादव को चारा घोटाले के मामले में आत्मसमर्पण करना पड़ा था। उनकी स्वास्थ्य आधार पर पेरोल बढ़ाने की याचिका को रांची हाईकोर्ट ने ठुकरा दिया था। अब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को आज भारतीय रेलवे के आईआरसीटीसी घोटाले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश होना है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का हर नेता इस बात को जानने के लिए उत्सुक है कि तेजस्वी यादव को इस घोटाले में जमानत मिलेगी या जेल होगी। यह पहला ऐसा मामला है जिसमें तेजस्वी को एक आरोपी के तौर पर कोर्ट में पेश होना है। लालू के समर्थकों का मानना है कि इस मामले में राबड़ी देवी और पार्टी सांसद प्रेम गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता को महिला होने के आधार पर जमानत मिलने की उम्मीद ज्यादा है।

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वहीं तेजस्वी और दूसरे आरोपियों के खिलाफ जेल या जमानत का मामला उनके खिलाफ मिले सबूतों और बचाव पक्ष के तर्क पर निर्भर करता है। तेजस्वी के करीबी लोगों का कहना है कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है। जांच के दौरान सीबीआई के बुलाने पर वह हमेशा हाजिर रहे। इसी वजह से उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने का कोई आधार नहीं बनता है। पूरा मामला दस्तावेजों पर आधारित है ऐसे में यदि जमानत मिल जाएगी तो उसका ट्रायल पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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पेशी के लिए पटना से दिल्ली रवाना होते हुए तेजस्वी ने पत्रकारों से कहा, ‘यह एक न्यायिक प्रक्रिया है, पूरा तो करना ही होगा।’ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 29 अगस्त को आईआरसीटीसी होटल आवंटन धनशोधन मामले में राजद प्रमुख लालू यादव, पत्नी राबड़ी यादव, बेटे तेजस्वी यादव औप अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोप पत्र में ईडी ने लालू के छोटे बेटे, राजद नेता पी.सी. गुप्ता, उनकी पत्नी सरला गुप्ता और लारा प्रोजेक्ट्स नाम की कंपनी और 10 अन्य पर आरोप लगाए हैं।

यह है ईडी का आरोप

ईडी का आरोप है कि पुरी और रांची स्थित रेलवे के दो होटलों के अधिकारों के सब-लीज कोचर के स्वामित्व वाली मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड को देने के लिए लालू और आईआरसीटीसी के अधिकारियों ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। होटल की सब-लीज के बदले पटना के प्रमुख स्थान की 358 डेसिमल जमीन फरवरी 2005 में मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (राजद सांसद पी.सी.गुप्ता के परिवार के स्वामित्व वाली कंपनी) को दी गई थी। उस समय के सर्किल दरों की तुलना में काफी दर यह जमीन कंपनी को आवंटित की गई थी। आरोपपत्र में ईडी ने कहा है कि मंहगी जमीन से लैस यह कंपनी धीरे-धीरे राबड़ी और तेजस्वी के नाम पर हस्तांतरित कर दी गई। बहुत मामूली कीमत पर शेयर खरीदकर ऐसा किया गया।

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