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दिल्ली में राष्ट्रीय और स्थानीय दोनों मुद्दे उठाएगी कांग्रेस

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने अगले लोकसभा चुनावों को लेकर अपना एजेंडा तय कर लिया है। पार्टी इस चुनाव में राफेल विमान समझौते के साथ सीलिंग के मुद्दे को जोरदार तरीके से भुनाने की तैयारी कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने बुधवार को पार्टी कार्यालय में दिल्ली के सभी लोकसभा-विधानसभा क्षेत्रों से आए पार्टी के लगभग दो सौ विशेष कार्यकर्ताओं की एक बैठक ली। जानकारी के मुताबिक अजय माकन ने पार्टी कार्यकर्ताओं को इन मुद्दों को जनता में किस तरह ले जाना है, इसकी जानकारी दी। कांग्रेस इस बार राष्ट्रीय और स्थानीय दोनों तरह के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर चुनाव में जाना चाहती है।

बुधवार की मीटिंग में शामिल कांग्रेस के एक पदाधिकारी के मुताबिक पार्टी का मानना है कि राफेल का मुद्दा ऐसा मामला है जिसमें भाजपा बुरी तरह घिर गई है। उसके नेताओं को इस मुद्दे पर जवाब देते नहीं बन रहा है। कांग्रेस पार्टी की रणनीति है कि इस मुद्दे को जितने बेहतर ढंग से जनता के सामने उठाया जा सके, उतना ही बेहतर होगा। इस नेता के मुताबिक अजय माकन ने उन्हें बताया कि इस मुद्दे पर भाजपा जितना जवाब देने की कोशिश करेगी, वह इसमें और उलझती जाएगी।

इसलिए दिल्ली की जनता के सामने इस मुद्दे के अधिकतम तथ्यों के साथ रखना है और इसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में पेश किया जाना है। उनका मानना है कि दिल्ली की जनता अपेक्षाकृत काफी जागरुक है और वह सिर्फ दिल्ली के स्थानीय ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी वोट करती है। इसलिए पार्टी इस मौके पर कोई चूक नहीं करना चाहती।

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वहीं स्थानीय मुद्दे के रूप में सीलिंग को कांग्रेस अपना बडा़ हथियार बनाने की तैयारी कर रही है। पार्टी के नेताओं के मुताबिक इस मुद्दे पर वह एक साथ भाजपा और आप दोनों को घेर सकती है। इसका सीधा सा कारण है कि एक तरफ तो भाजपा के पास इस मुद्दे पर बचाव करने का कोई उपाय नहीं है। पार्टी के मुताबिक अगर वह चाहती तो इस मुद्दे पर अधिसूचना जारी कर लोगों को राहत दिलवा सकती थी। सुप्रीम कोर्ट के सामने भी लोगों को राहत दिलाने का वैकल्पिक रास्ता दिया जा सकता था। साथ ही आम आदमी पार्टी जो अभी तक इस मामले को पूरी तरह केंद्र के पाले में डालने की कोशिश कर रही है, वह भी इस मामले में दोषी है।

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9 लाख उद्योगों पर संकट, 50 लाख लोग प्रभावित

पार्टी के मीडिया इंचार्ज माजिद अहमद ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने अपने शासन काल में ही एक नियम बना दिया था जिसके मुताबिक दिल्ली के लोगों को कुटीर उद्योग के रुप में गैर प्रदूषणकारी उद्योग चलाने की इजाजत दी गई थी।

आज दिल्ली में 1,55,950 मेन्यूफैक्चरिंग यूनिट हैं जिन पर तालाबंदी की तलवार लटक रही है। इसके अलावा हाउसहोल्ड इंडस्ट्री चलाने वाले लोगों पर भी बंदी की तलवार लटकी हुई है। इन दोनों को मिलाकर दिल्ली के कुल 8,75,308 लोगों के रोजी-रोटी पर संकट बना हुआ है।

उन्होंने बताया कि लगभग नौ लाख उद्योगों पर संकट होने से सीधे 50 लाख लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है। पार्टी का मानना है कि इस मुद्दे का गहरा असर हो सकता है। यही कारण है कि पार्टी इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने जा रही है। अपनी इसी रणनीति को आगे बढ़ाने के क्रम में पार्टी 31 अगस्त को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निवास पर प्रदर्शन करने की योजना भी बना रही है।

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