Thursday , November 15 2018
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बाजार में अब नोटबंदी के पहले से भी ज्यादा करंसी!

नोटबंदी की घोषणा करते समय सरकार ने इसे नकली नोटों पर लगाम लगाने का प्रयास बताया था। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से बुधवार को जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि 500 व 1000 रुपये के नोट बंद होने से अन्य मूल्य वर्ग के नोटों में नकली करेंसी का आवागमन बड़े पैमाने पर बढ़ गया है।

खासतौर पर नोटबंदी के बाद आए 500 रुपये के नए नोट और 2000 रुपये के नोट की नकल तैयार नहीं हो पाने का सरकार का दावा फ्लॉप साबित होता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-17 के मुकाबले 2017-18 में 500 और 2000 के नकली नोट की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है।

2016-17 में 500 रुपये के 199, 2000 रुपये के महज 638 नकली नोट (पुराने) देश में मिले थे, लेकिन 2017-18 में 500 रुपये के 9892 और 2000 रुपये के 17929 नकली नोट बाजार में चलन पाए गए।

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154 फीसदी बढ़ गए 50 रुपये के नकली नोट
वित्त वर्ष 2016-17 के मुकाबले 2017-18 में 100 रुपये की नकली करेंसी में 35 फीसदी और 50 रुपये की नकली करेंसी में 154.3 फीसदी का जबरदस्त इजाफा हुआ है। बता दें कि 50 रुपये का भी नया नोट जारी किया गया है, लेकिन पुराने नोट को बंद नहीं किया गया था।

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नए नोट छापने में दोगुना हुआ था खर्च

  • 3421 करोड़ रुपये नोट छापने में खर्च किए थे आरबीआई ने 2015-16 में
  • 7965 करोड़ रुपये रहा 2016-17 में आरबीआई का नोट प्रिंटिंग का खर्च
  • 500 व 2000 रुपये के नोटों की पूरी सीरीज छापने के कारण दोगुना हुआ ये खर्च
  • 4912 करोड़ रुपये का नोट प्रिंटिंग खर्च किए आरबीआई ने 2017-18 में
  • 01 जुलाई से अगले साल 30 जून तक को एक वर्ष मानता है आरबीआई अपने रिकॉर्ड में

पहले से ज्यादा है मार्केट में अब करेंसी

  • 18.03 लाख करोड़ रुपये अर्थव्यवस्था में मौजूद थे मार्च 2018 को
  • 03 लाख करोड़ रुपये ज्यादा है ये नोटबंदी के समय के 15.41 लाख करोड़ रुपये से
  • 37 फीसदी बढ़ोतरी हुई है पिछले एक साल में अर्थव्यवस्था में मौजूद नकदी में
  • 72.7 फीसदी हिस्सेदारी 500 व 2000 रुपये के नए नोट की है अब अर्थव्यवस्था में

छोटे नोटों का उपयोग बढ़ा

  • 5.8 फीसदी ज्यादा उपयोग हो रहे हैं अब अर्थव्यवस्था में 100 रुपये या उससे कम के नोट
  • 06 फीसदी के करीब घटी है अर्थव्यवस्था में सबसे बड़े नोटों की मौजूदगी
  • 80.6 फीसदी हिस्सेदारी है अर्थव्यवस्था में इस समय 500 व 2000 रुपये के नोटों की
  • 86.4 फीसदी हिस्सेदार थे नोटबंदी से पहले 500 व 1000 रुपये के नोट
  • 9.9 फीसदी ज्यादा नोट थे मार्च 2018 को बाजार में मार्च 2016 के मुकाबले
रिपोर्ट में दिए नोट वापसी के तथ्य
  • 15.31 लाख करोड़ रुपये के बंद किए गए नोट वापस लौटे
  • 15.41 लाख करोड़ रुपये कीमत के 500 व 1000 के नोट थे सर्कुलेशन में
  • 99.3 फीसदी रकम इस तरह से वापस लौट आई है बैंकों में
  • 10720 करोड़ रुपये की जंक करेंसी अभी भी है गायब

नोटबंदी के बाद 500 और 1000 के 99.3 फीसदी नोट लौटे बैंकों में

पीएम मोदी की 8 नवंबर, 2016 को अचानक घोषित की गई नोटबंदी कितनी पास रही या फेल, इस पर बहस एक बार फिर शुरू हो गई है। दरअसल आरबीआई की आई ताजा रिपोर्ट में नोटबंदी में 500 व 1000 के बंद किए गए 99.3 फीसदी नोट वापस बैंकों में जमा हो जाने की जानकारी दी है। विपक्ष ने अधिकतर नोट बैंकों में आ जाने की रिपोर्ट के बाद फिर से नोटबंदी फेल रहने का आरोप लगाकर सरकार से पूछा है कि काला धन कहां गया?

इस कारण दो साल लगे गिनती में
नोटबंदी के समय बैंकों में जमा जंक करेंसी के अतिरिक्त जनता के पास मौजूद नोट लौटाने के लिए उन्हें बैंक में बदलने या फिर अस्पताल, पेट्रोल पंप, बिजली का बिल और सरकारी बसों में किराया चुकाने आदि विकल्प दिए गए थे। इन तरीकों के अलावा जगह-जगह जब्त किए गए रुपये के हिसाब-किताब के कारण नोटबंदी से लौटी जंक करेंसी का सही आंकड़ा जानने में दो साल लग गए।

अर्थव्यवस्था को 1.5 फीसदी जीडीपी का झटका : चिदंबरम
आरबीआई की रिपोर्ट को लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा कि याद है किसने कहा था कि 3 लाख करोड़ वापस नहीं लौटे हैं और ये सरकार को लाभ हुआ है? मैंने तब इस पैसे के भूटान या नेपाल में अटके होने की संभावना जताई थी। नोटबंदी की भारतीय अर्थव्यवस्था ने बड़ी कीमत चुकाई है।

विकास के संदर्भ में जीडीपी को 1.5 फीसदी का झटका लगा है। अकेले एक साल में 2.25 लाख करोड़ का घाटा हुआ है। 100 से ज्यादा की जिंदगी छिन गई। 15 करोड़ से ज्यादा दिहाड़ी कर्मचारी कई हफ्तों तक भूखे रहे। हजारों लघु उद्योग बंद हो गए। लाखों नौकरियां खत्म हो गईं।

नोटबंदी ने अपना लक्ष्य हासिल किया : वित्त मंत्रालय
वित्त मंत्रालय के सचिव (वित्तीय मामले) एससी गर्ग का कहना है कि नोटबंदी ने अपना लक्ष्य काफी हद तक हासिल किया। इससे काला धन, आतंकी फंडिंग पर लगाम लगाने, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने और नकली करेंसी को चलन से बाहर करने का लक्ष्य काफी हद तक हासिल हो गया।

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