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अब प्लास्टिक के कचरे से बनेंगी सड़कें

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण में अनिवार्य करने की योजना बनाई है। इस परियोजना पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी सहमति जताई है। उम्मीद है कि इस बारे में शीघ्र ही आधिकारिक निर्णय हो जाएगा और सड़कों के निर्माण में अलकतरा (कोलतार) के साथ ही 10 फीसदी प्लस्टिक कचरे का इस्तेमाल हो सकेगा।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल से तीन फायदे होंगे। इससे शहर, गांव, कस्बों में उड़ते पॉलिथीन और प्लास्टिक के कचरे से निजात मिलेगी, इससे सड़कें ज्यादा मजबूत बनने के साथ लागत भी घटेगी और इससे प्लास्टिक कचरा बीनने वालों को आमदनी का एक जरिया मिलेगा तथा गांव-शहर स्वच्छ होंगे वह अलग।

राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यूं तो नवंबर 2015 में ही एक आदेश के जरिये सभी डेवलपर को प्लास्टिक का कचरा इस्तेमाल करने को कहा गया है, लेकिन अभी तक इस पर अमल हो नहीं पाया है।

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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में भी इसका इस्तेमाल होना था, लेकिन कुछ तकनीकी एवं प्रशासनिक बाधाओं की वजह से पहले चरण में इसका इस्तेमाल नहीं हो पाया। अब केंद्र सरकार के तीन मंत्रालय इस दिशा में आगे आए हैं, ताकि इस योजना पर अमल किया जा सके।

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देश में है तकनीक

अधिकारी का कहना है कि मदुरै स्थित त्यागराजन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में रसायन शास्त्र के प्राध्यापक राजगोपाल वासुदेवन ने सबसे पहले प्लास्टिक कचरे से सड़क बनाने की तकनीक खोजी थी। इसके बाद इस दिशा में और काम हुआ है और अब तो यह स्थापित हो गया है कि गिट्टी में अलकतरा मिलाते वक्त ही प्लास्टिक कचरे की कतरन से बना पेस्ट मिला दिया जाए, तो सड़क निर्माण की लागत न सिर्फ घट जाती है, बल्कि उसकी मजबूती भी बढ़ जाती है। परीक्षण के तौर पर देश के कई हिस्सों में इस तकनीक से सड़कें बन चुकी हैं।

ऐसे तैयार होती है सड़क
सबसे पहले पॉलिथीन के कैरी बैग, प्लास्टिक के कप-ग्लास, नमकीन-भुजिया के पैकेट या रैपर, चॉकलेट-लेमन चूस के रैपर और शैंपू-सॉस आदि के सैशे को बीन कर उसकी सफाई की जाती है। फिर उसे स्रेडर मशीन से एक निश्चित आकार में काट लिया जाता है। उसके बाद उसे 165 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे तेल जैसा एक पेस्ट तैयार हो जाता है। फिर इसे मिक्सिंग चैंबर में भेज दिया जाता है, जहां गिट्टी में अलकतरे के साथ प्लस्टिक कचरे से तैयार पेस्ट को भी मिला दिया जाता है।

नई मशीनरी की जरूरत नहीं 
राजमार्ग मंत्रालय के इंजीनियरों का कहना है कि राजमार्ग निर्माण में इस समय जिन मशीनरी का उपयोग हो रहा है, उसी का इस्तेमाल करते हुए प्लास्टिक कचरे से सड़क बनाई जा सकती है। उसमें सिर्फ प्लास्टिक कचरे को काटने वाले स्रेडर मशीन को लगाना होगा और उसे गर्म करने के लिए एक चैंबर बनाना होगा। बाकी सारी मशीनरी पहले वाली ही होगी।

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