Thursday , November 15 2018
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मीडिया को मत रोकिए

प्रधानमंत्री ने मन की बात के 47वें संस्करण में एक बार फिर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने का मुद्दा उठाया,
साथ ही स्त्री सुरक्षा के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता जतलाई। पिछले चार सालों से वे कई बार ऐसा कर चुके हैं। ये और बात
है कि इन चार सालों में उन्नाव, कठुआ, मुजफ्फरपुर जैसे दिल दहलाने वाले मामले दे-रु39या के सामने आए। जाहिर है
नारी सुरक्षा पर उनकी बातें चुनावी जुमलों से ज्यादा कोई मायने नहीं रखती हैं। इधर बच्चों के उत्पीड़न
संबंधी -िरु39याकायतों के लिए खोली गई 1098 नंबर की हेल्पलाइन पर भी चैंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है।
पिछले 3 सालों में भारतीय पुलिस को 1 करोड़ 36 लाख खामो-रु39या टेलिफोन कॉल्स मिली हैं। यानी ऐसी कॉल्स,
जिनमें फोन तो आता है, लेकिन दूसरी ओर से कोई बात नहीं होती। पीड़ित बच्चा खुद या उसकी ओर से कोई
वयस्क उत्पीड़न की -िरु39याकायत करने के लिए फोन तो करता है, लेकिन -रु39याायद डर के मारे कुछ बता नहीं पाता। 2015-ंउचय16
में 56,582, 2016-ंउचय17 में 70,767 और 2017-ंउचय18 में 81,147 ऐसे मामले इस हेल्पलाइन के जरिए सामने आए, जिसमें
पुलिस के हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी। अनाथ, असहाय, परित्यक्त बच्चे कई बार गंभीर उत्पीड़न का -िरु39याकार होते हैं, खासकर
लड़कियों के लिए यौन उत्पीड़न बड़ी त्रासदी होती है। ऐसे में अपने बचाव के लिए वे इस हेल्पलाइन का सहारा लेते
हैं। याद करें मुजफ्फरपुर कांड, जिसमें बालिकागृह में मासूम बच्चियों को किस तरह प्रताड़ित किया गया। उन्हें
न-रु39याीली दवाएं देकर बलात्कार किया गया। दह-रु39यात से भरी वे लड़कियां भी -रु39याायद ऐसे ही किसी हेल्पलाइन की तला-रु39या में
होंगी। एक आश्रयगृह में 30 बच्चियों के साथ बलात्कार की इस घटना में मीडिया एक तरह से हेल्पलाइन बनकर ही सामने

आया, क्योंकि उसकी रिपोर्टिंग के कारण ही कई -रु39याक्ति-रु39यााली लोगों की संलिप्तता, प्र-रु39याासन की लापरवाही जैसी बातें
सामने आईं। मीडिया ने इस मामले को और प्रमुखता दी, क्योंकि मुख्य आरोपी भी अखबार का मालिक था और
सत्ता से उसे भरपूर विज्ञापन मिलते थे। मीडिया की रिपोर्टिंग के कारण ही केबिनेट मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।
लेकिन हाल ही में मुजफ्फरपुर कांड से जुड़ी जांच की खबरों के प्रका-रु39यान को लेकर पटना हाईकोर्ट में
महाधिवक्ता ललित कि-रु39याोर ने एक फरमान जारी किया है। पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमआर -रु39यााह और जस्टिस रवि रंजन
का हवाला देते हुए आदे-रु39या जारी किया कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के जांच से जुड़ी कोई भी खबरें मीडिया
प्रका-िरु39यात न करें। महाधिवक्ता ने बिहार सरकार को खत लिखा और कहा कि यह सुनि-िरु39यचत किया जाए कि मीडिया मुजफ्फरपुर
कांड की जांच से जुड़ी हुई कोई भी खबरों का प्रका-रु39यान न करें। अदालत के इस फैसले पर पटना के वरि-ुनवजयठ
पत्रकारों ने एक हस्ताक्षरित बयान जारी किया है कि वे पटना हाईकोर्ट के गत 23 अगस्त के उस आदे-रु39या को लेकर बहुत
चिंतित हैं ं, जिसमें मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन -रु39याो-ुनवजयाण मामले से जुड़े समाचार प्रका-िरु39यात नहीं करने का निर्दे-रु39या
है, क्योंकि यह जांच को प्रभावित करेगा। पत्रकारों का यह भी कहना है कि मीडिया द्वारा मुजफ्फरपुर बालिका गृह में
किये गये जघन्य कृत से संबंधित समाचार प्रका-िरु39यात और दिखाये जाने के बाद लोग उसके बारे में जान पाए तथा इस पर सुप्रीम
कोर्ट ने संज्ञान लिया। पत्रकारों की चिंता वाजिब है। मुजफ्फरपुर रेपकांड रा-ुनवजयट्रीय सुरक्षा का मसला नहीं है, जिसकी
रिपोर्टिंग होने पर गोपनीयता भंग होती हो। बल्कि इसके बारे में तो जनता तक रोजाना खबर पहुंचाई जानी चाहिए,
ताकि इंसाफ की लड़ाई में सहायता मिले। इसमें जिन रसूखदार लोगों का हाथ है, वे खुद को बचाने के लिए किसी
भी किस्म की क्रूरता तक जा सकते हैं। दूसरी ओर इस मामले में जो पीड़ित हैं, वे अनाथ, बेसहारा हैं और वे इन
क्रूर लोगों से अपने दम पर नहीं लड़ सकती हैं। उन्हें न्याय दिलाने में नि-ुनवजयपक्ष रिपोर्टिंग से मदद मिलेगी।
व्यापमं, बीआरडी, कठुआ, मुजफ्फरपुर जैसे अनेक कांडों और घोटालों को जनता के सामने लाने में मीडिया
की बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में उस पर किसी तरह की रोक लगने से लोकतंत्र और जनहित को नुकसान पहुंचेगा।

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