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मुजफ्फरपुर बालिका गृह : पटना हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े तथ्यों के प्रकाशन पर लगाई थी रोक

बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में पटना हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े तथ्यों के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने ये भी कहा था सीबीआई जांच से जुड़े तथ्यों की जानकारी प्रिंट और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया तक कैसे पहुंच रही है। इससे जांच प्रभावित हो रही है।

अब इस मामले पर पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.आर.शाह ने कहा है, ‘हम फ्रीडम ऑफ स्पीच के खिलाफ नहीं हैं’। जांच प्रभावित न हो इसलिए ये आदेश दिया गया है। बता दें चीफ जस्टिस इस मामले पर मंगलवार को विचार करेंगे।

सुनवाई के दौरान वकीलों ने उठाया था मामला

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जानकारी के मुताबिक सोमवार को सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने चीफ जस्टिस एम.आर. शाह और जस्टिस डॉ. रविरंजन की खंडपीठ के सामने इस मामले पर जुड़ी खबरों के छापने और दिखाने पर लगी रेक का मामला उठाया था। जिसके बाद चीफ जस्टिस ने ये बात कही।

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वहीं पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई को अद्यतन (अपडेट) जांच रिपोर्ट नहीं सौंपने के कारण लताड़ लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार की विश्वसनीयता दांव पर लगी हुई है। ऐसे में जांच अधिकारी का तबादला कैसे हो गया। कोर्ट ने सीबीआई से इससे संबंधित स्थिति स्पष्ट करने को भी कहा था। मामले पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमआर शाह तथा न्यायमूर्ति डॉ. रविरंजन की खंडपीठ ने जांच के तथ्यों के प्रकाशन पर रोक तो लगाई ही। साथ ही सीबीआई को अद्यतन रिपोर्ट, सीलबंद लिफाफे में 27 अगस्त तक सौंपने को कहा था।

जिसके बाद सीबीआई के डीआईजी ने सीलबंद लिफाफे में अद्यतन रिपोर्ट भी पेश की। इसके अलावा कोर्ट ने सीबीआई एसपी जे.पी. मिश्रा की जगह लखनऊ के ऑफिसर को मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले की जांच का इंचार्ज बनाए जाने पर भी सफाई मांगी। साथ ही इससे संबंधित फाइल पेश करने का आदेश भी दिया।

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