Thursday , November 15 2018
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गोल्ड के साथ तीरंदाजों के निशाने पर नौकरी

तिरंगे के मान के लिए मंगलवार को गोल्ड मेडल पर निशाना साधने वाली पुरुष और महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम के छह में से पांच सदस्य बेरोजगार हैं। कोरिया के खिलाफ इन तीरंदाजों के निशाने पर गोल्ड के साथ नौकरी होगी।

2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाले राजस्थान के रजत चौहान और एशियाई तीरंदाजी का गोल्ड जीतने वाली अर्जुन अवार्डी आंध्र प्रदेश की ज्योति सुरेखा के खाते में कल दो और बड़े पदक जुड़ जाएंगे, लेकिन इन्हें इनके पिछले प्रदर्शन का ही मेहनताना नहीं मिला है।

राज्य सरकारों ने इनके प्रदर्शन पर इन्हें नौकरी और ईनामी राशि देने की घोषणा कर वाहवाही तो लूट ली, लेकिन दोनों को ही आज तक नौकरी का  इंतजार है। सुरेखा को तो नौकरी के साथ घोषित एक करोड़ की राशि भी अब तक नहीं मिली है। यहीं इंचियोन में गोल्ड जीतने वाले अभिषेक वर्मा एकमात्र नौकरी पर लगे तीरंदाज हैं,  लेकिन उन्हें घोषणा के बावजूद प्रमोशन नहीं दिया गया है।

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फाइनल की पूर्व संध्या रजत के मुंह से यही निकलता है, उन्होंने तो अपना काम कर दिया है, लेकिन तीर चलाने से पेट नहीं भरता है। घर तो नौकरी से ही चलेगा। सिर्फ यही नहीं टीम के कोच लोकेश को यह नहीं मालूम है कि निजी स्कूल में लगी उनकी नौकरी सुरक्षित रहेगी या नहीं। वह टीम के साथ यहां जकार्ता आए तो स्कूल ने उनका वेतन रोक लिया। वहीं दूसरे कोच जीवनजोत सिंह को कहा गया है कि उन्हें यूनिवर्सिटी की नौकरी और नेशनल कैंप की ड्यूटी में से एक को चुनना होगा।

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तीरंदाजों ने जताई उम्मीद काश यह पदक दिला दे नौकरी

पुरुष टीम में अभिषेक और रजत के अलावा दिल्ली केअमन सैनी हैं, जबकि महिला टीम में ज्योति के अलावा झारंखड की मधुमिता और मध्य प्रदेश की मुस्कान किरार हैं। जबलपुर की मुस्कान अभी 12वीं कक्षा की छात्रा हैं। उनका कैरियर अभी शुरू हो रहा है, लेकिन बाकी नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

चार साल की उम्र में कृष्णा नदी को पार करने का कारनामा करने वाली ज्योति खुलासा करती हैं कि बीते वर्ष अर्जुन अवार्डी बनने के बाद आंध्र सरकार ने उन्हें नौकरी और एक करोड़ की राशि देने की घोषणा की थी, लेकिन घोषणाएं सरकारी फाइलों में दफ्न हैं। वहीं रजत कहते हैं कि उनकी सफलता को नई स्पोर्ट्स पॉलिसी ने ही दफ्ना दिया। नई पॉलिसी में 2016 के बाद एशियाई खेलों और ओलंपिक में पदक जीतने वाले को नौकरी दी जाएगी। उनकी पुरानी घोषणा भुला दी गई।

रजत दुख से कहते हैं कि वह तो अपना काम कर रहे हैं लेकिन सरकारों को भी अपनी जिम्मेदारी नहीं भूलनी चाहिए। अभिषेक के मुताबिक उन्हें प्रमोशन के लिए हर बार डीओपीटी के नियमों का हवाला देकर चुप कर दिया जाता है। अब उन्होंने भी सरकारी तंत्र को अपने तीर से जवाब देने का निश्चय कर लिया है। तीरंदाज कहते हैं कि उन्हें उम्मीद है कि यहां आया पदक उन्हें नौकरियां दिला देगा।

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